Nirjala Ekadashi 2026: हर साल अमूमन कुल 24 एकादशी पड़ती है. इसमें निर्जला एकादशी सबसे उत्तम मानी जाती है. ऐसी धार्मिक मान्यता है कि सिर्फ एक निर्जला एकादशी का व्रत रखने से 24 एकादशियों के बराबर पुण्य प्राप्त होता है. निर्जला एकादशी के दिन विष्णु भगवान की पूजा की जाती है. इस साल निर्जला एकादशी 25 जून को है. निर्जला एकादशी का व्रत सभी एकादशियों में कठिन माना जाता है क्योंकि इस व्रत को रखने वाले व्रती न तो पानी पीते हैं और न ही भोजन ग्रहण करते हैं. आइए जानते हैं यदि अनजाने में टूट जाए निर्जला एकादशी का व्रत तो व्रती को क्या करना चाहिए और किन परिस्थितियों में व्रती पानी पी सकते हैं?
निर्जला एकादशी का व्रत टूटने पर क्या करें
निर्जला एकादशी का व्रत बिना भोजन किए और बिना पानी के किया जाता है. यदि किसी व्रती ने अनजाने में निर्जला एकादशी के व्रत के समय पानी पी लिया या कुछ खा लिया तो इसे जानबूझकर की गई गलती के समान नहीं माना जाता है. धार्मिक शास्त्रों के साथ-साथ साधु-संत बताते हैं कि भगवान हमेशा भाव के भूखे होते हैं. यदि भूलवश आपका व्रत टूट गया है तो परेशान होने की जरूरत नहीं है. यदि निर्जला एकादशी का व्रत टूट जाता है तो सबसे पहले भगवान विष्णु से क्षमा मांगे. भगवान विष्णु से प्रार्थना करें कि हे प्रभु मुझसे भूलवश ये गलती हुई है, जिसे माफ कर दें. व्रत टूटने पर ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जप करें. आप विष्णु सहस्रनाम या गीता का पाठ भी कर सकते हैं. व्रत टूटने पर अपनी क्षमता के अनुसार दान-पुण्य करें. पूरे दिन सात्विक आचरण रखें. निर्जला एकादशी व्रत की भावना को बरकरार रखें. इस दिन किसी से झूठ और कठोर न बोलें.
निर्जला एकादशी व्रत में किन परिस्थितियों में पी सकते हैं पानी
ऐसी धार्मिक मान्यता है कि निर्जला एकादशी व्रत का पूर्ण फल तभी मिलता है जब इसे बिना जल और अन्न ग्रहण किए रखा जाए. कथा के मुताबिक महाभारत काल में भीम ने भी इसी प्रकार निर्जल रहकर यह व्रत किया था, जिससे उन्हें सभी एकादशियों का पुण्य प्राप्त हुआ. धार्मिक नियमों के अनुसार एकादशी तिथि के सूर्योदय से लेकर द्वादशी तिथि के सूर्योदय तक व्रती न तो अन्न ग्रहण करता है और न ही पानी पीता है. हालांकि कुछ विशेष परिस्थितियों में इसमें थोड़ी छूट दी जाती है. यदि कोई व्यक्ति बीमार है, अत्यधिक वृद्ध है या फिर स्वास्थ्य कारणों से निर्जला नहीं रह सकता तो वह पानी पी सकता है. यदि आपकी सेहत पूरी तरह ठीक है तो व्रत को शास्त्र अनुसार निर्जला ही रखना शुभ माना गया है. यदि किसी को गंभीर स्वास्थ्य समस्या है तो उसे व्रत रखने से पहले चिकित्सकीय सलाह जरूर लेनी चाहिए.
निर्जला एकादशी की तिथि और पारण का समय
वैदिक पंचांग के मुताबिक ज्येष्ठ महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि का शुभारंभ 24 जून को शाम शाम 6:12 बजे होगा और इस तिथि का समापन 25 जून 2026 को रात 8:09 बजे होगा. हिंदू धर्म में किसी भी व्रत और पर्व का निर्धारण उदया तिथि के आधार पर किया जाता है.ऐसे में उदया तिथि के अनुसार निर्जला एकादशी का व्रत 25 जून दिन गुरुवार को रखा जाएगा. निर्जला एकादशी व्रत का पारण 26 जून को सुबह 5 बजकर 25 मिनट से 8 बजकर 13 मिनट के बीच करना शुभ रहेगा. ऐसी धार्मिक मान्यता है कि पारण निर्धारित समय के भीतर ही करना चाहिए, तभी व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है.
पूजा के लिए शुभ मुहूर्त
निर्जला एकादशी के दिन गुरुवार को पूजा और आध्यात्मिक साधना के लिए कई शुभ समय उपलब्ध रहेंगे. ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:05 बजे से 4:45 बजे तक रहेगा. यह समय ध्यान, जप, तप और भगवान विष्णु के स्मरण के लिए सबसे श्रेष्ठ माना जाता है. अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:56 बजे से दोपहर 12:52 बजे तक रहेगा, यह समय पूजा, संकल्प और शुभ कार्यों के लिए अत्यंत लाभकारी माना जाता है. पूरे दिन रवि योग की उपस्थिति इस तिथि की आध्यात्मिक महत्ता को और बढ़ा देगी.