Advertisement

Nirjala Ekadashi and Gayatri Jayanti 2026: 25 जून को है निर्जला एकादशी और गायत्री जयंती, जानें इन दोनों पर्वों की महिमा

निर्जला एकादशी और गायत्री जयंती 25 जून को है. निर्जला एकादशी के दिन बिना जल के उपवास रहने से साल की सारी एकादशियों का पुण्य फल प्राप्त हो जाता है. इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है. ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष में ही गायत्री जयंती मनाई जाती है. इस दिन वेद माता गायत्री का प्राकट्य हुआ था.

Nirjala Ekadashi and Gayatri Jayanti
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 24 जून 2026,
  • अपडेटेड 7:50 PM IST

ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को निर्जला एकादशी कहा जाता है. इस बार 25 जून को निर्जला एकादशी है. भीम ने एक मात्र इसी उपवास को रखा था और मूर्छित हो गए थे. अतः इसको भीमसेनी एकादशी भी कहा जाता है. इस दिन बिना जल के उपवास रहने से साल की सारी 24 एकादशियों का पुण्य फल प्राप्त हो जाता है. इसके अलावा धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष, चारों पुरुषार्थों की प्राप्ति भी होती है. इस दिन अच्छे स्वास्थ्य तथा सुखद जीवन की मनोकामना पूरी की जा सकती है. 

निर्जला एकादशी के उपवास की क्या है विधि 
प्रातःकाल स्नान करके सूर्य देवता को जल अर्पित करें. इसके बाद पीले वस्त्र धारण करके भगवान विष्णु की पूजा करें. उन्हें पीले फूल, पंचामृत और तुलसी दल अर्पित करें. इसके बाद श्री हरि और मां लक्ष्मी के मन्त्रों का जाप करें. किसी निर्धन व्यक्ति को जल का, अन्न-वस्त्र का  या जूते और छाते का दान करें. निर्जला एकादशी के दिन वैसे तो निर्जल उपवास ही रखा जाता है लेकिन आवश्यकता होने पर जलीय आहार और फलाहार लिया जा सकता है. 

निर्जला एकादशी पर क्या करें 
इस दिन केवल जल और फल ग्रहण करके उपवास रखें. प्रातः और सायंकाल अपने गुरु या भगवान विष्णु की उपासना करें. रात्रि में जागरण करके श्री हरि की उपासना अवश्य करें. इस दिन ज्यादा से ज्यादा समय मंत्र जाप और ध्यान में लगाएं. जल और जल के पात्र का दान करना विशेष शुभकारी होगा. 

क्या है गायत्री जयंती की महिमा
ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष में ही गायत्री जयंती मनाई जाती है. इस दिन वेद माता गायत्री का प्राकट्य हुआ था. गायत्री मंत्र, दुनिया का सबसे शक्तिशाली मंत्र माना जाता है. इस दिन गायत्री मंत्र का जाप करने से विभिन्न मनोकामनाएं पूरी की जा सकती हैं. ब्रह्मा, विष्णु और महेश भी गायत्री माता की पूजा करते हैं. गायत्री माता से ही 4 वेदों की उत्पत्ति हुई है. गायत्री मंत्र में 4 वेदों का सार है. 

गायत्री माता की पूजा करने और गायत्री मंत्र का जाप करने से मानसिक शांति मिलती है, मन एकाग्र होता है, आत्मिक चेतना का विकास और आध्यात्मिक उन्नति होती है. बुद्धि और ज्ञान में बढ़ोतरी होती है. इस साल की गायत्री जयंती पर रवि योग, शिव योग और सिद्ध योग बनेंगे. उस दिन स्वाति नक्षत्र है. गायत्री जयंती पर शिव योग प्रात:काल से लेकर सुबह 10 बजकर 54 मिनट तक है, उसके बाद से सिद्ध योग है. ये दोनों ही योग जप, तप, साधना के लिए श्रेष्ठ हैं.


 

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Advertisement