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Nirjala Ekadashi Daan: जल से लेकर वस्त्र तक, निर्जला एकादशी पर इन चीजों का करें दान, खुल जाएंगे सौभाग्य के द्वार

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो व्यक्ति श्रद्धा और नियमपूर्वक निर्जला एकादशी का व्रत करता है, उसे सभी एकादशियों के व्रत के बराबर पुण्य फल प्राप्त होता है. ज्येष्ठ माह की भीषण गर्मी में पड़ने वाली इस एकादशी पर बिना पानी ग्रहण किए व्रत रखने का विधान है.

Nirjala Ekadashi 2026
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 24 जून 2026,
  • अपडेटेड 11:52 AM IST

Nirjala Ekadashi 2026: हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व माना जाता है. साल भर में आने वाली सभी एकादशियों में निर्जला एकादशी को सबसे श्रेष्ठ माना गया है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो व्यक्ति श्रद्धा और नियमपूर्वक निर्जला एकादशी का व्रत करता है, उसे सभी एकादशियों के व्रत के बराबर पुण्य फल प्राप्त होता है. ज्येष्ठ माह की भीषण गर्मी में पड़ने वाली इस एकादशी पर बिना पानी ग्रहण किए व्रत रखने का विधान है. साथ ही धर्म ग्रंथों में इस दिन दान-पुण्य को भी अत्यंत शुभ बताया गया है. निर्जला एकादशी पर कुछ विशेष वस्तुओं का दान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन में सुख-समृद्धि बढ़ती है.

जल का दान सर्वश्रेष्ठ
निर्जला एकादशी के दिन जलदान को सबसे पुण्यकारी माना गया है. ज्येष्ठ महीने की तेज गर्मी में प्यासे लोगों को पानी पिलाना और जल से भरा घड़ा दान करना शुभ माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जल जीवन का आधार है और इसका दान करने से मन को शांति तथा सकारात्मक ऊर्जा मिलती है.

सत्तू, गुड़ और जल का करें दान
उत्तर भारत में निर्जला एकादशी पर सत्तू दान करने की पुरानी परंपरा है. सत्तू शरीर को ठंडक और ऊर्जा प्रदान करता है. ऐसे में जरूरतमंद लोगों को सत्तू, गुड़ और जल का दान करना लोक कल्याणकारी कार्य माना जाता है. यह अन्नदान के समान पुण्यदायी माना गया है.

छाता दान से मिलती है विशेष कृपा
धर्म शास्त्रों में छत्रदान यानी छाता दान का विशेष महत्व बताया गया है. यह किसी व्यक्ति को धूप और कठिन परिस्थितियों से बचाने का प्रतीक माना जाता है. निर्जला एकादशी के दिन जरूरतमंद लोगों को छाता दान करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं.

पंखा दान करना भी शुभ
पुराने समय में निर्जला एकादशी पर हाथ से चलने वाले पंखे का दान किया जाता था. आज भी गर्मी से राहत देने वाली वस्तुओं का दान शुभ माना जाता है. जरूरतमंद लोगों को पंखा या अन्य शीतलता प्रदान करने वाली वस्तुएं देने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है और मानसिक संतोष मिलता है.

वस्त्रदान से बढ़ती है सकारात्मकता
वस्त्र मनुष्य की मूल आवश्यकताओं में शामिल हैं. इसलिए वस्त्रदान को श्रेष्ठ दानों में गिना गया है. निर्जला एकादशी पर गरीब और जरूरतमंद लोगों को कपड़े दान करने से जीवन में सकारात्मकता आती है और जरूरतमंदों की सहायता का पुण्य प्राप्त होता है.

फल और अन्नदान का विशेष महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, फलदान को सात्विक दान माना जाता है. मौसमी फल दान करने से स्वास्थ्य और मंगल की कामना पूरी होती है. वहीं अन्नदान को महादान कहा गया है. किसी भूखे व्यक्ति को भोजन कराने से संतोष, सुख और समृद्धि में वृद्धि होती है.

पद्म पुराण में बताए गए विशेष दान
पद्म पुराण के अनुसार, निर्जला एकादशी पर आसन, शय्या, जल, गो, कमंडलु और छाते का दान अत्यंत शुभ माना गया है. इसके अलावा ब्राह्मणों को जूते और शक्कर के साथ जल से भरे घड़े दान करने का भी विशेष महत्व बताया गया है. धार्मिक मान्यता है कि ऐसे दान करने वाले व्यक्ति को भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है और उसे पुण्य फल की प्राप्ति होती है.

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