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माघ मेला के रंगीन पंडालों में फटीचर बाबा का अनोखा कैंप, दर्शन कर भावुक हो जाते हैं श्रद्धालु

14 जनवरी तक यह कैंप तीन फटीचर बाबा राम का आश्रय है, लेकिन मकर संक्रांति पर ये करीब 100 भक्त आ जाएंगे. सभी का बाहरी नाम भले जो हो, कैंप में वे आने के बाद फटीचर बाबा रामराम बनेंगे और सभी मिलकर राम नाम का गुणगान करेंगे. ये सभी चित्रकूट के निवासी हैं.

फटीचर बाबा
gnttv.com
  • प्रयागराज,
  • 12 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 4:34 PM IST

माघ मेला के संगम तट पर साधु-संतों के हर रूप-रंग भक्ति की छटा बिखेरते हैं. इन्हीं रंगों में तरह-तरह के बाबा भी नजर आते हैं कोई आश्चर्यचकित करने वाले, तो कोई रुद्राक्षों से सजे आकर्षक बाबा. प्रयागराज के सेक्टर-6 के अंतिम छोर पर एक ऐसा सादा कैंप लगा है, जिसका बैनर पढ़कर हर राहगीर मुस्कुरा उठता है और डरते हुए आगे बढ़ जाता है. बैनर पर लिखा है "फटीचर बाबा का रामराम" नाम इतना सच्चा और सरल कि श्रद्धा जगाती है, पर हंसी भी ला देती है.

साधारण श्रद्धालु जैसे लगते हैं फटीचर बाबा
फटीचर बाबा का रामराम नाम और सादगी की अनोखी मिसाल ये कैंप राम नाम पर पूरी तरह समर्पित है. फिलहाल यहां सिर्फ तीन फटीचर बाबा राम रहते हैं, जो जमीन पर साधारण ढंग से बैठे मिलते हैं मानो मेले में घूमने वाले साधारण श्रद्धालु ही हों. कैंप में प्रवेश करते ही राम-राम की ध्वनि गूंजती है हर काम से पहले राम नाम का जाप होता है. इस कैंप में रहने वाले बाबा के कपड़ों पर भी राम-राम लिखा हुआ है.

जमीन पर बैठकर खाते हैं खाना
इनका भोजन बेहद सादा मोटी रोटी, दाल और मिर्ची. वे कहते हैं, "हमारा सब कुछ राम है. राम नाम में ही हमारा संसार बसता है." भिक्षा नहीं, सेवा का मार्ग ये फटीचर बाबा का राम राम कैंप में रहने वाले भिक्षा नहीं मांगते. दान में मिले धन से कंबल, साड़ियां और चादरें खरीदकर जरूरतमंदों को बांटते हैं. वे स्वयं भोजन बनाकर लोगों को खिलाते भी हैं. कैंप में कोई भेदभाव नहीं हर आने वाला जमीन पर बैठकर सबके साथ भोजन ग्रहण करता है. सबसे खास बात, कैंप में प्रवेश करने वाला हर व्यक्ति का नाम "फटीचर बाबा रामराम" हो जाता है. आप को बता दे राम नाम के बाद न 'जी' न 'श्री' सिर्फ 'राम' लगाया जाता है.

14 जनवरी तक फटीचर बाबा राम का एकांत आश्रय
14 जनवरी तक यह कैंप तीन फटीचर बाबा राम का आश्रय है, लेकिन मकर संक्रांति पर ये करीब 100 भक्त आ जाएंगे. सभी का बाहरी नाम भले जो हो, कैंप में वे आने के बाद फटीचर बाबा रामराम बनेंगे और सभी मिलकर राम नाम का गुणगान करेंगे. ये सभी चित्रकूट के निवासी हैं.

दो साल पहले पड़ा फटीचर बाबा का रामराम
दो साल पहले उनके गुरुदेव ब्रह्मदेव ने ही कैंप का नाम "फटीचर बाबा का रामराम" रखा. संस्था बहुत पुरानी है. वे बताते हैं, राम "जब निकले थे, तो न चप्पल थी, न कुछ और सिर्फ फकीरी का जज़्बा. मेले में ऐसा कैंप सुनकर हर कोई आश्चर्यचकित होता है. जो भी इनसे मिलने जाता है, उनकी सादगी और सत्यनिष्ठा की तारीफ करता हुआ लौटता है. यहां जाति, धर्म या पद का कोई भेद नहीं सब राम के नाम में डूबे हैं. यह कैंप न सिर्फ भक्ति का प्रतीक है, बल्कि सच्ची फकीरी का जीवंत उदाहरण भी.

-आनंद राज की रिपोर्ट

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