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Pitru Paksha 2026 Start Date: 26 या 27 कब से शुरू हो रहा पितृ पक्ष? जानें पिंड दान का महत्व और प्रथम दिन का मुहूर्त

सनातन परंपरा में पूर्वजों और पितरों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का सबसे पावन समय 'पितृ पक्ष' (श्राद्ध महालय) माना जाता है. वर्ष में एक बार आने वाले इन 15 दिनों के दौरान श्रद्धालु अपने दिवंगत माता-पिता, दादा-दादी और पूर्वजों की आत्मशांति के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करते हैं. मान्यता है कि इस अवधि में अर्पित किए गए अन्न-जल से पितर तृप्त होते हैं और अपने वंशजों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं.

पितृ पक्ष की शुरूआत कब से
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 21 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 1:34 PM IST

पूरे साल में एक बार 15 दिनों के लिए आने वाला पितृ पक्ष एक मात्र ऐसा टाइम है, जब लोग अपने पूर्वजों को याद करते हैं. उनके लिए श्राद्ध और पिंड दान करते हैं. माना जाता है कि पितृ पक्ष में पिंड दान और तर्पण करने से पूर्वजों का पेट साल भर के लिए भर जाता है, जिससे उनकी आत्मा भटकती नहीं है. जिसके बाद पूर्वजों की आत्मा अपने समस्त वंशजों को आशीर्वाद देकर अपने लोग लौट जाते हैं. लेकिन हर साल की तरह इस बार भी पितृ पक्ष की शुरुआत और तारीख (26 और 27 सितंबर) को लेकर लोगों में थोड़ा भ्रम है. काशी यानी बनारसी पंचांग के अनुसार 26 सितंबर को पूर्णिमा श्राद्ध होगा, जबकि 27 सितंबर से प्रतिपदा श्राद्ध के साथ पितृ पक्ष की शुरुआत होगी.

26 सितंबर को होगा पूर्णिमा श्राद्ध
26 सितंबर को उन पूर्वजों का श्राद्ध किया जाएगा, जिनका निधन पूर्णिमा तिथि को हुआ था. इसे पूर्णिमा श्राद्ध कहा जाता है. इसलिए कई जगह पितृ पक्ष की शुरुआत 26 सितंबर से बताई जा रही है, लेकिन काशी पंचांग के अनुसार पितृ पक्ष की शुरुआत 27 सितंबर से होगी ऐसा बताया जा रहा है. 27 सितंबर 2026, रविवार को आश्विन कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा से पितृ पक्ष शुरू होगा. काशी के पंचांग के अनुसार इस दिन प्रतिपदा तिथि सुबह सूर्योदय के समय रहेगी और रात 8:59 बजे तक रहेगी. इसके बाद द्वितीया तिथि शुरू हो जाएगी. इस बार पितृ पक्ष 27 सितंबर से 10 अक्टूबर तक चलेगा. 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ इसका समापन होगा.

पितरों को याद करने का खास समय है पितृ पक्ष
पूरे साल में आने वाले 15 दिनों का पितृ पक्ष पूर्वजों को समर्पित माना जाता है. यह वह समय होता है, जब लोग अपने दिवंगत माता-पिता, दादा-दादी, नाना-नानी और परिवार के दूसरे पूर्वजों को याद करते हैं. उनके नाम से श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करते हैं. धार्मिक मान्यता के अनुसार, पितृ पक्ष में किए गए इन कर्मों से पितरों को तृप्ति मिलती है और उनके प्रति हमारी श्रद्धा और कृतज्ञता भी व्यक्त होती है. पितृ पक्ष में पिंडदान को श्राद्ध कर्म का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है. आमतौर पर चावल, तिल, जौ आदि से पिंड बनाए जाते हैं और विधि-विधान के साथ पितरों को अर्पित किए जाते हैं. 

धार्मिक मान्यता है कि पितृ पक्ष के दौरान पूर्वजों के निमित्त अन्न, जल और पिंड अर्पित करने से उन्हें तृप्ति मिलती है. इसी वजह से इस दौरान परिवार के लोग अपने पूर्वजों की मृत्यु तिथि के अनुसार श्राद्ध करते हैं. माना जाता है कि जब पितरों को तर्पण और पिंडदान के जरिए तृप्ति मिलती है तो उनकी आत्मा को शांति मिलती है और वे अपने वंशजों को आशीर्वाद देकर जाते हैं. पिंडदान के साथ तर्पण की भी खास परंपरा है. तर्पण का अर्थ ही पितरों को तृप्त करना माना जाता है. इसमें जल के साथ तिल और कुश आदि अर्पित किए जाते हैं. इसके बाद पितरों का स्मरण करते हुए उनके लिए प्रार्थना की जाती है. 
 

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