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Pitru Paksha 2026: अगर दरवाजे पर आये ये 5 जीव, तो समझे सीधे आए हैं पितृ, जरूर दें खाना

पितृ पक्ष में पूर्वजों के तर्पण का विशेष महत्व है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्राद्ध का भोजन इन जीवों को कराने से सीधे पितरों तक तृप्ति पहुंचती है और उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है.

pitru paksha 2026
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 29 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 12:24 PM IST

पितृ पक्ष एक खास समय होता है पितृों को याद करके और उनके प्रति आभार व्यक्त करने का. वहीं हिंदू धर्म ग्रंथों में पूर्वजों को याद करने और उनके लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने का खास महत्व बताया गया है. इस दौरान कई घरों में हर रोज, घर के लोगों के खाने से पहले पशु-पक्षियों के लिए भोजन निकाला जाता है. धार्मिक मान्यता है कि कुछ जीवों को भोजन कराने से भोजन सीधे पूर्वजों तक पहुंचता है और उनका आशीर्वाद मिलता है. इसलिए अगर घर के आंगन या छत पर ये कुछ जीव दिख जाए तो उन्हें भगाना उचित नहीं है.

कौआ 
पितृ पक्ष में कौए का खास महत्व माना जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार कौए को पितरों से जुड़ा और उनका संदेशवाहक माना जाता है. यही वजह है कि श्राद्ध का भोजन सबसे पहले कौए के लिए निकाला जाता है. माना जाता है कि कौआ भोजन ग्रहण कर ले तो पितरों तक अर्पण पहुंच गया.

गाय
गाय को भी पितृ पक्ष में भोजन कराने की परंपरा है. कई परिवारों में श्राद्ध के भोजन का एक हिस्सा गाय के लिए अलग से निकाला जाता है. धार्मिक मान्यता में गाय को सम्मान देने और भोजन कराने को पितरों के प्रति श्रद्धा से जोड़कर देखा जाता है.

कुत्ते
पितृ पक्ष के दौरान कुत्ते को भोजन कराना भी पंचबलि की परंपरा का हिस्सा माना जाता है. श्राद्ध के भोजन में से एक हिस्सा कुत्ते के लिए निकाला जाता है. इसका उद्देश्य केवल भोजन कराना ही नहीं, बल्कि सभी जीवों के प्रति दया और सम्मान का भाव रखना भी माना जाता है.

चींटी
पंचबलि में चींटियों के लिए भोजन निकालने की भी परंपरा बताई गई है. आटे और चीनी से बनी छोटी-छोटी गोलियां चींटियों को खिलाने की मान्यता है. इसे भी पितरों की शांति और जीवों को भोजन कराने से जोड़कर देखा जाता है.

सांप दिखे तो क्या मानते हैं?
कुछ लोक-मान्यताओं में पितृ पक्ष के दौरान सांप के दिखाई देने को भी पितरों से जुड़े संकेत के तौर पर देखा जाता है. हालांकि, सांप पंचबलि में शामिल पांच पारंपरिक जीवों की सूची का हिस्सा नहीं है. इसलिए इसे धार्मिक नियम की तरह नहीं, बल्कि लोक-मान्यता के तौर पर लोग देखते हैं.
 

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