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Pradosh Vrat 2026: मई महीने का पहला प्रदोष व्रत कब? जानें सही डेट, शुभ मुहूर्त और भगवान शंकर की पूजा विधि

May Pradosh Vrat 2026 Date and Muhurat: हर महीने के कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है. प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव की पूजा की जाती है. यहां आप जान सकते हैं कि मई महीने का पहला प्रदोष व्रत किस दिन हैं, पूजा के लिए शुभ मुहूर्त  क्या और भगवान शंकर की पूजा विधि क्या है?

Lord Shankar
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 13 मई 2026,
  • अपडेटेड 2:13 PM IST

हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है. इस दिन भगवान शिव की आराधना की जाती है. ऐसी धार्मिक मान्यता है कि प्रदोष व्रत रखने से महादेव और मां पार्वती की विशेष कृपा रहती है. हर महीने के कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है. यदि आप महादेव और मां पार्वती को प्रसन्न करना चाहते हैं तो प्रदोष व्रत रख सकते हैं. आपको मालूम हो कि जिस दिन प्रदोष व्रत पड़ता है, उसी दिन के अनुसार उसका नाम रखा जाता है. प्रदोष व्रत के दिन महादेव के नटराज स्वरूप की पूजा करना शुभ होता है. गुरु प्रदोष व्रत के दिन बृहस्पति देव की भी पूजा की जाती है. यहां आप जान सकते हैं साल 2026 के पांचवें महीने मई का पहला प्रदोष व्रत कब है?

कब है मई 2026 का पहला प्रदोष व्रत
पंचांग के मुताबिक ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि का शुभारंभ 14 मई को सुबह 11:20 बजे से होगा इसका समापन 15 मई 2026 को सुबह 8:31 बजे होगा. ऐसे में प्रदोष व्रत 14 मई दिन गुरुवार को रखा जाएगा.  गुरुवार के दिन पड़ने के कारण इसे गुरु प्रदोष व्रत कहा जाएगा. प्रदोष व्रत रखने से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है. मान-सम्मान और पद-प्रतिष्ठा में वृद्धि होती है. इस दिन व्रत रखके शत्रुओं पर विजय प्राप्त की जा सकती है. 

प्रदोष व्रत के दिन पूजा के लिए क्या है शुभ मुहूर्त
प्रदोष व्रत की पूजा सूर्यास्त के समय यानी प्रदोष काल में की जाती है. 14 मई को प्रदोष की पूजा के लिए सबसे शुभ मुहूर्त शाम 7:50 बजे से लेकर रात 9:17 बजे तक रहेगा. इस तरह से महादेव की आराधना के लिए करीब 2 घंटे 12 मिनट का समय मिलेगा. आपको मालूम हो कि शुभ मुहूर्त बीत जाने के बाद की गई पूजा का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता है. ऐसे में शुभ मुहूर्त का विशेष ध्यान रखें. गुरु प्रदोष व्रत का पारण 15 मई को सुबह 8 बजकर 31 के बाद ही करें, क्योंकि इस समय तक त्रयोदशी तिथि व्याप्त रहने वाली है.

प्रदोष व्रत के लिए पूजा सामग्री लिस्ट
जल, गंगाजल, कच्चा दूध, दही, शहद, घी, शक्कर, सफेद चंदन, अक्षत, बिल्व पत्र, धतूरा, भांग, शमी के पत्ते, आक के फूल, सफेद फूल, कलावा, भस्म, शुद्ध घी, रुई की बत्ती, कपूर, अगरबत्ती, धूप, फल, मिठाई.

प्रदोष व्रत की पूजा विधि
1. प्रदोष व्रत की पूजा सुबह और शाम दोनों समय करना शुभ होता है.
2. इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और फिर साफ कपड़े धारण करें.
3. इसके बाद भगवान शिव के सामने व्रत का संकल्प लें.
4. दिनभर सात्विक रहें. संभव हो तो निराहार रहें अथवा फलाहार व्रत रख सकते हैं. 
5. मंदिर घर में भगवान शिव और माता पार्वती की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें. 
6. शिवलिंग का पहले जल, फिर पंचामृत और अंत में शुद्ध जल से अभिषेक करें.
7. भगवान शंकर को चंदन, भस्म, बिल्व पत्र, धतूरा, फूल, धूप, दीप, फल और मिठाई अर्पित करें.
8. फिर भगवान शिव के मंत्रों का जाप करें. व्रत कथा और शिव चालीसा का पाठ करें.
9. पूजा के अंत में घी का दीपक और कपूर जलाकर भगवान शिव की आरती करें.

 

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