सावन का महीना यानी भगवान शिव की भक्ति का दिन हर शिव भक्त इस महीने का इसलिए इंतजार करता है कि वह अपने संकल्प के साथ कांवड़ लेकर निकल पड़े और भगवान शिव के मंदिर में जलाभिषेक कर सके. शिव भक्त हर उम्र का होता है. ऐसे ही कम उम्र के शिव भक्त भी दिखे. जिनके हाथों में कांवड़ था और पैर में घुंघरू रास्ते पर छम छम करते प्रयागराज के दशा सुमेध घाट पहुंचे.
हाथ में कांवड़, पैरों में घुंघरू-
हाथों में कांवड़, मन में शिव, मुंह में भगवान शिव के उद्घोष लिए हुए बनारस के साथ क्लास 7वीं, 10वीं और 12वीं के छात्र पहुंचे हैं. इनकी खासियत जब ये घाट पर उतरे तो घुंघरू के आवाज के साथ उतरे और जिधर जाते घुंघरू की आवाज गूंजती. दरअसल इन शिव भक्तों ने घुंघरू इसलिए धारण रखा है.
पैरों में घुघरू पहनने की वजह-
जब यह प्रयागराज से जल लेकर बनारस की ओर चले तो इनका कांवड़ खंडित ना हो, इसके लिए सिटी बजाते हुए और घुंघरू की आवाज के साथ चलते हैं, ताकि घुंघरू और सीट की आवाज की वजह से इनका कांवड़ खंडित ना हो. यह चारों अपने परिवार के साथ निकले हैं. भगवान शिव का उद्घोष करते हुए आगे-आगे निकल पड़े.
4 साल से ले जा रहे हैं कांवड़-
यह सभी पिछले 4 साल से कांवड़ उठा रहे हैं और इस साल यानी 5वें साल भी कांवड़ उठाया है. इनका कहना है कि हमारा संकल्प परिवार में सब कुछ अच्छा रहे और हम लोग पढ़ लिख कर कुछ अच्छा बन सके. प्रयागराज के घाट पर हर दिन कांवरियों के अलग-अलग रूप नजर आते हैं. यह भी रूप कांवरियों का कुछ अलग था.
सबसे छोटा कांवड़िया 14 साल का-
ऐसे ही बनारस के रहने वाले कई लोग कांवड़ लेकर प्रयागराज पहुंचे हैं. यहां से जल भरकर बनारस के शिवालय में जाकर जलाभिषेक करेंगे. सबसे खास बात इस ग्रुप में सबसे कम उम्र का 14 साल और उसके बाद सबसे ज्यादा उम्र 25 साल का युवक शामिल है. यह सभी 5 सालों से कांवड़ उठा रहे हैं. और इस बार भी उठा रहे हैं. अपने पुरखों के द्वारा हर साल उठाए जाने वाले कांवड़ की परंपरा को इन्होंने जारी कर रखा है. बनारस की इस ग्रुप का भी यह कहना है कि हम लोग सब अलग-अलग उम्र के लोग हैं और पढ़ाई के साथ सब अलग-अलग काम करते हैं और हम सब लोग कांवड़ इसलिए उठाया है कि भगवान शिव हम लोग को सफल करें.
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