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Pajawa Ramlila: प्रयागराज की पजावा रामलीला देखने दूर-दूर से आते हैं श्रद्धालु, 100 साल से अधिक पुराने हैं सोने और चांदी से तैयार लाहौरी मुकुट

प्रयागराज की प्राचीन रामलीलाओं में पजावा रामलीला अपना अलग ही महत्व रखती है. नवरात्रि और दशहरा के दौरान यहां होने वाले रामलीला मंचन को देखने के लिए प्रयागराज ही नहीं, बल्कि देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु और दर्शक पहुंचते हैं. इस रामलीला की खासियत ये है कि आज भी कई परंपराएं और पुराने स्वरूप में निभाई जाती हैं.

Lahori Mukut
आनंद राज
  • प्रयागराज ,
  • 07 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 5:15 PM IST

शारदीय नवरात्रि का शुभारंभ 11 अक्टूबर 2026, दिन रविवार से होने जा रहा है. चारों तरफ पूजा पंडाल और दुकान पर दशहरा और शारदीय नवरात्रि की रौनक भी नजर आने लगी है. नवरात्रि के साथ ही प्रयागराज में ऐतिहासिक दशहरा और रामलीला उत्सव की शुरुआत हो जाती है. इसी के तहत महंत बाबा हाथी राम पजावा रामलीला कमेटी की ओर से प्राचीन मुकुट पूजन विधि-विधान से किया गया.

प्रयागराज की प्राचीन रामलीलाओं में पजावा रामलीला अपना अलग ही महत्व रखती है. नवरात्रि और दशहरा के दौरान यहां होने वाले रामलीला मंचन को देखने के लिए प्रयागराज ही नहीं, बल्कि देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु और दर्शक पहुंचते हैं. इस रामलीला की खासियत ये है कि आज भी कई परंपराएं और पुराने स्वरूप में निभाई जाती हैं.

100 साल से अधिक पुराने हैं लाहौरी मुकुट
पजावा रामलीला में भगवान श्रीराम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न और माता सीता के रामलीला कलाकार मंच पर जो वस्त्र, आभूषण और धारण किए जाने वाले मुकुट बेहद खास हैं. बताया जाता है कि ये मुकुट 100 वर्ष से भी अधिक पुराने हैं और इन्हें लाहौर के कुशल कारीगरों ने तैयार किया था. इन मुकुटों को सोने और चांदी के मिश्रण से तैयार किए जाने की बात कही जाती है. यही वजह है कि इनका ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व होने के साथ-साथ इनकी कीमत भी काफी अधिक मानी जाती है. कमेटी की ओर से इन बहुमूल्य मुकुटों को बेहद सुरक्षित तरीके से रखा जाता है. रामलीला शुरू होने से पहले इनकी साफ-सफाई और रखरखाव का विशेष ध्यान दिया जाता है.

रामलीला के मंचन में किया जाता है इस्तेमाल
बताया जाता है कि इन मुकुटों का निर्माण उस दौर में हुआ था, जब भारत और लाहौर के बीच आज जैसी सीमाएं नहीं थीं. लाला मनोहर दास 'बच्चा जी' के परिवार की ओर से इन मुकुटों को बनवाया गया था, जिन्हें लाहौर के कारीगरों ने तैयार किया था. पीढ़ियों से इन्हें संभालकर रखा गया है और आज भी रामलीला के मंचन में परंपरा के अनुसार इनका इस्तेमाल किया जाता है.

विधि-विधान से किया गया पूजन 
दशहरा उत्सव और रामलीला मंचन से पहले इन प्राचीन मुकुटों का प्रयागराज के पुराने शहर के शाहगंज स्थित प्राचीन राम जानकी मंदिर में विधि-विधान से पूजन किया गया. पूजन के दौरान रामलीला कमेटी के पदाधिकारी और सदस्य मौजूद रहे. मुकुटों को पूजन से पहले साफ-सफाई कराकर चमकाया गया. इसके बाद धार्मिक परंपराओं के अनुसार उनका पूजन किया गया. अब रामलीला मंचन के दौरान कलाकार इन्हीं पारंपरिक मुकुटों और आभूषणों को धारण करेंगे. पजावा रामलीला कमेटी के वित्त मंत्री सचिन कुमार गुप्ता के मुताबिक मुकुटों की साफ-सफाई और उन्हें चमकाने का काम भी पूरा हो चुका है. इसके बाद विधि-विधान से मुकुट पूजन कराया गया. पजावा रामलीला की खासियत सिर्फ रामलीला का मंचन नहीं, बल्कि सदियों पुरानी परंपराओं, वेशभूषा, आभूषण और धार्मिक अनुष्ठानों को आज भी उसी श्रद्धा और परंपरा के साथ आगे बढ़ाना है.


 

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