गणपति बप्पा के स्वागत की तैयारियां शुरू हो चुकी है. शहर के अलग-अलग हिस्सों में गणेश प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने का काम तेज़ हो गया है. कहीं कलाकार मिट्टी को आकार देकर भगवान गणेश का स्वरूप गढ़ रहे हैं, तो कहीं रंगों और सजावट के जरिए प्रतिमाओं को आकर्षक बनाया जा रहा है.
गणेश चतुर्थी को लेकर तैयारियां जोरों पर
हर साल की तरह इस बार भी गणेश चतुर्थी को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं. मूर्तिकार दिन-रात मेहनत कर गणेश प्रतिमाओं को आकार देने में जुटे हैं. कच्ची मिट्टी से शुरू होने वाला ये सफर… धीरे-धीरे भगवान गणेश के मनमोहक स्वरूप में बदल जाता है.कहीं मूर्ति की आंखों को आकार दिया जा रहा है, तो कहीं मुकुट और आभूषणों पर काम चल रहा है.
20 साल से दो बहनें बना रहीं मूर्ति
मूर्तिकारों के लिए ये सिर्फ रोज़गार का जरिया नहीं… बल्कि आस्था और कला को एक साथ पेश करने का मौका भी है. दो बहनें 20 साल से एक साथ गणेश प्रतिमा तैयार कर रही हैं. पहले ये काम उनके पिता करते थे लेकिन उनके गुजरने के बाद दोनों बहनों ने मोर्चा संभाल रखा है. दोनों बहनें बताती हैं कि वो खुद गणपति बैठाती हैं.
कलाकार घंटों मेहनत कर रहे हैं
गणपति बप्पा के स्वागत में अब कुछ ही वक्त बाकी है… और यही वजह है कि मूर्तिकारों की रफ्तार भी बढ़ गई है. मिट्टी के इस ढांचे को भगवान गणेश के खूबसूरत स्वरूप में बदलने के लिए कलाकार घंटों मेहनत कर रहे हैं. चेहरे के भाव से लेकर मुकुट और आभूषण तक… हर छोटी-बड़ी बारीकी पर खास ध्यान दिया जा रहा है.
इको फ्रेंडली गणेश मूर्ति भी ट्रेंड में
इस बार भी लोगों के बीच पर्यावरण को लेकर जागरूकता बढ़ी है. इसीलिए कई जगहों पर मिट्टी से बनी प्रतिमाओं को प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि गणेश उत्सव आस्था के साथ-साथ पर्यावरण के लिए भी बेहतर संदेश दे.
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