रक्षाबंधन भाई-बहन के अटूट प्रेम और एक-दूसरे की रक्षा के वचन का त्योहार है. इस साल रक्षाबंधन 28 अगस्त, शुक्रवार को मनाया जाएगा. इस दिन बहनें भाई की कलाई पर राखी बांधने से पहले उन्हें तिलक लगाती हैं और फिर अक्षत यानी चावल लगाकर उनकी सुख-समृद्धि और लंबी उम्र की कामना करती हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि तिलक के बाद चावल लगाने की परंपरा क्यों है और इसका क्या महत्व माना जाता है. अगर नहीं तो चलिए हम आपको बताते हैं...
राखी से पहले तिलक लगाने का महत्व
रक्षाबंधन पर भाई को राखी बांधने से पहले तिलक लगाना शुभ माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, तिलक भगवान विष्णु का प्रतीक माना जाता है. माथे के बीच का स्थान ज्ञान और चेतना का केंद्र माना जाता है. ऐसे में यहां तिलक लगाने से सकारात्मकता, एकाग्रता और स्मरण शक्ति बढ़ने की मान्यता है.
तिलक के साथ चावल क्यों लगाते हैं
तिलक लगाने के बाद उस पर अक्षत यानी चावल लगाया जाता है. पंडित राकेश झा के अनुसार, अक्षत का अर्थ होता है ऐसा अनाज जो टूटा हुआ न हो. इसलिए भाई के माथे पर अक्षत लगाने की परंपरा भाई-बहन के रिश्ते और प्रेम के हमेशा अटूट रहने का प्रतीक मानी जाती है. इसके अलावा अक्षत भाई की लंबी उम्र, सुख और मंगल की कामना से भी जुड़ा है. धार्मिक मान्यताओं में चावल को समृद्धि और देवी लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है. वहीं तिलक को भगवान विष्णु से जोड़ा जाता है. इसलिए रक्षाबंधन पर तिलक और अक्षत लगाने की परंपरा को शुभ माना जाता है.
तिलक और अक्षत लगाने के जरूरी नियम
राखी बांधने से पहले ही भाई को तिलक और अक्षत लगाना चाहिए. इसके बाद राखी बांधने की परंपरा है. तिलक लगाते समय भाई के सिर पर रुमाल या सफेद कपड़ा और बहन के सिर पर दुपट्टा या कपड़ा होना शुभ माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, तिलक पर सूखे चावल नहीं लगाने चाहिए. अक्षत को हल्का गीला करके ही तिलक पर लगाने की परंपरा है. साथ ही चावल टूटे हुए नहीं होने चाहिए, क्योंकि अक्षत का अर्थ ही होता है बिना टूटा और बिना खंडित अनाज.
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