बसंत पंचमी का पर्व पूरे देश में भक्ति और उत्साह के साथ मनाया जाएगा. इस दिन मां सरस्वती की पूजा का विशेष महत्व है. विद्या, कला और संगीत से जुड़े लोगों के लिए यह दिन बेहद खास है. इस बार बसंत पंचमी पर बुधादित्य योग और सर्वार्थ सिद्धि योग जैसे दुर्लभ संयोग बन रहे हैं, जो शुभ कार्यों के लिए अत्यंत फलदायी माने जा रहे हैं.
शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
बसंत पंचमी 23 जनवरी 2026 को है. बसंत पंचमी पर मां सरस्वती की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त शुक्रवार सुबह 8:45 से 11:45 तक अमृत बेला और दोपहर 12:09 से 12:57 तक अभिजीत मुहूर्त है. ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस दिन पीले या सफेद वस्त्र पहनकर पूजा करनी चाहिए. मां सरस्वती को श्वेत चंदन, पीले और सफेद फूल अर्पित करें. प्रसाद में मिश्री, दही और केसर मिश्रित खीर चढ़ाना शुभ माना जाता है. ओम एम सरस्वते नमः मंत्र का जाप करने से विद्या और एकाग्रता का वरदान मिलता है.
संगम पर महास्नान का महत्व
प्रयागराज में माघ मेले के चौथे महास्नान का आयोजन बसंत पंचमी पर किया जा रहा है. संगम की रेती पर लाखों श्रद्धालु गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम में स्नान कर महापुण्य अर्जित करेंगे. महामंडलेश्वर आशुतोष महाराज ने बताया कि यह स्नान अमृत स्नान के समान है, जो सभी पापों का नाश करता है. श्रद्धालु रातभर रुककर ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करेंगे.
विद्यार्थियों के लिए विशेष उपाय
ज्योतिषाचार्यों ने विद्यार्थियों के लिए मां सरस्वती की पूजा के विशेष उपाय बताए. ओम सरस्वती नमस्तुभ्यं मंत्र का जाप करें और अपनी पुस्तकों का पूजन करें. हल्दी से लिखे गए 'एम' मंत्र को स्टडी टेबल पर रखें. उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके पढ़ाई करें. यह उपाय स्मरण शक्ति और एकाग्रता बढ़ाने में सहायक है.
दुर्लभ योग और राशियों पर प्रभाव
इस बार बसंत पंचमी पर बुधादित्य योग, गजकेसरी योग और सर्वार्थ सिद्धि योग जैसे दुर्लभ संयोग बन रहे हैं. ज्योतिषाचार्य नंदिता पांडे ने बताया कि इन योगों का प्रभाव विभिन्न राशियों पर सकारात्मक रहेगा. मेष और वृश्चिक राशि के जातकों को करियर में लाभ मिलेगा. विद्यार्थियों और प्रतियोगी-परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लोगों के लिए यह समय विशेष शुभ है.
आध्यात्मिक शांति और मानसिक एकाग्रता
बसंत पंचमी का दिन आध्यात्मिक शांति और मानसिक एकाग्रता के लिए भी महत्वपूर्ण है. मां सरस्वती की पूजा से तनाव और अज्ञान का नाश होता है. ज्योतिषाचार्य अरविंद जी ने बताया कि ओम सरस्वती नमस्तुभ्यं मंत्र का जाप करने से मन शांत होता है और ज्ञान का प्रकाश फैलता है.
सांस्कृतिक महत्व
बसंत पंचमी से होली की शुरुआत भी होती है. वृंदावन में बांके बिहारी मंदिर में इस दिन अबीर और गुलाल के थाल रखे जाते हैं. उत्तराखंड में होलिका के लिए ध्वज लगाया जाता है. यह पर्व न केवल धार्मिक बल्कि सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है.