माघ शुक्ल की पंचमी तिथि को विद्या और बुद्धि की देवी मां सरस्वती की उपासना की जाती है. इसी उपासना के पर्व को बसंत पंचमी कहते हैं. वर्ष के कुछ विशेष शुभ काल में से एक होने के कारण इसको अबूझ मुहूर्त भी कहा जाता है. इसमें विवाह, निर्माण और अन्य शुभ कार्य किए जा सकते हैं.
ऋतुओं के इस संधि काल में ज्ञान और विज्ञान दोनों का वरदान प्राप्त किया जा सकता है. इसके अलावा संगीत कला और आध्यात्म का आशीर्वाद भी इस काल में लिया जा सकता है. यदि कुंडली में विद्या और बुद्धि का योग नहीं है या शिक्षा की बाधा का योग है तो इस दिन मां सरस्वती की विशेष पूजा करके उसको ठीक किया जा सकता है. इस साल 23 जनवरी 2026 को बसंत पंचमी का पर्व है.
किन ग्रहों को मजबूत करने के लिए बसंत पंचमी पर जरूर करनी चाहिए पूजा
1. कुंडली में यदि बुध कमजोर हो तो बुद्धि कमजोर हो जाती है. ऐसी दशा में यदि मां सरस्वती की उपासना हरे फल अर्पित करके करें तो लाभदायक होगा.
2. बृहस्पति के कमजोर होने पर विद्या प्राप्त करने में बाधा आती है. ऐसे में बसंत पंचमी के दिन पीले वस्त्र धारण करके पीले पुष्प और पीले फलों से मां की उपासना करें.
3. यदि शुक्र कमजोर हो तो मन की चंचलता भी होती है और करियर का चुनाव भी नहीं हो पाता. ऐसी दशा में बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की उपासना सफेद फूलों से करना लाभदायक होता है.
कैसे करें मां सरस्वती की उपासना
1. बसंत पंचमी के दिन पीले, बसंती या सफेद वस्त्र धारण करें. काले या लाल वस्त्र नहीं पहनें.
2. इसके बाद पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके पूजा की शुरुआत करें.
3. सूर्योदय के बाद ढाई घंटे या सूर्यास्त के बाद के ढाई घंटे का प्रयोग पूजा के लिए करें.
4. मां सरस्वती को श्वेत चन्दन और पीले तथा सफेद पुष्प अवश्य अर्पित करें.
5. प्रसाद में मिसरी, दही और लावा समर्पित करें.
6. केसर मिश्रित खीर अर्पित करना सर्वोत्तम होगा.
7. मां सरस्वती के मूल मंत्र ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः का जाप करें. जाप के बाद प्रसाद ग्रहण करें.
मां सरस्वती की उपासना से किस प्रकार के हो सकते हैं लाभ
जिन लोगों को एकाग्रता की समस्या हो, बसंत पंचमी से नित्य प्रातः सरस्वती वंदना का पाठ करें. मां सरस्वती के चित्र की स्थापना करें, इसकी स्थापना पढ़ने के स्थान पर करना श्रेष्ठ होगा. मां सरस्वती का बीज मंत्र भी लिखकर टांग सकते हैं. जिन लोगों को सुनने या बोलने की समस्या है वो लोग सोने या पीतल के चौकोर टुकड़े पर मां सरस्वती के बीज मंत्र ऐं को लिखकर धारण कर सकते हैं. यदि संगीत या वाणी से लाभ लेना है तो केसर अभिमंत्रित करके जीभ पर ऐं लिखवाएं. किसी धार्मिक व्यक्ति या माता से लिखवाना अच्छा होगा.
क्या बसंत पंचमी पर बिना मुहूर्त के भी कर सकते हैं विवाह
बसंत पंचमी को वर्ष का अबूझ और स्वयं सिद्ध मुहूर्त माना जाता है. इस दिन विवाह, गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक कार्य किए जा सकते हैं. फिर भी शुक्र और बृहस्पति की स्थिति देख लेनी चाहिए.