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Maihar Sharda Shakti Peeth: 51 शक्ति पीठों में से एक है मैहर का शारदा शक्ति पीठ, यहीं गिरा था माता सती का कंठ और हार, शारदीय नवरात्रि के पहले दिन मां के दरबार में उमड़ा आस्था का सैलाब

शारदीय नवरात्रि का शुभारंभ हो गया है. मां दुर्गा के भक्त मंदिरों सहित शक्ति पीठों में दर्शन के लिए उमड़ रहे हैं. मैहर स्थित शारदा शक्ति पीठ में सुबह तीन बजे हुई प्रथम आरती दर्शन के लिए भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा. यहां इस साल शारदीय नवरात्रि में लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है. 

Maihar Sharda Shakti Peeth
वेंकटेश द्विवेदी
  • सतना,
  • 11 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 2:34 PM IST

शारदीय नवरात्रि की शुरुआत के साथ ही मध्य प्रदेश के मैहर स्थित मां शारदा शक्तिपीठ में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है. नवरात्रि के पहले दिन रविवार को सुबह तीन बजे मंदिर के पट खुलने के बाद से ही माता के दर्शन का सिलसिला शुरू हो गया. रात से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु कतारों में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करते नजर आए. मां शारदा के जयकारों से पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय हो गया. नवरात्रि मेले को देखते हुए जिला प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं और मंदिर परिसर में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है.

त्रिकूट पर्वत पर विराजती हैं मां शारदा
मैहर की मां शारदा का मंदिर विंध्य पर्वत श्रेणी के त्रिकूट पर्वत पर करीब 600 फीट की ऊंचाई पर स्थित है. यह मंदिर देशभर के श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां शारदा को ज्ञान और बुद्धि की देवी मां सरस्वती का स्वरूप माना जाता है. नवरात्रि के दौरान यहां दूर-दराज के क्षेत्रों से भक्त माता के दर्शन करने पहुंचते हैं. मंदिर तक पहुंचने के लिए पहले श्रद्धालुओं को कठिन रास्तों और पगडंडियों का सहारा लेना पड़ता था, लेकिन अब यहां 1038 सीढ़ियों के अलावा वाहन और रोपवे जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध हैं. इससे बुजुर्गों और दूर से आने वाले श्रद्धालुओं को मंदिर तक पहुंचने में सहूलियत मिलती है.

मां सती के हार से जुड़ी है मैहर नाम की मान्यता
मैहर शक्तिपीठ को लेकर कई प्राचीन धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं. पौराणिक कथा के अनुसार, राजा दक्ष के यज्ञ में अपमानित होने के बाद माता सती ने अपने प्राण त्याग दिए थे. इसके बाद भगवान शिव उनके पार्थिव शरीर को लेकर विचरण करने लगे. मान्यता है कि भगवान विष्णु ने सृष्टि का संतुलन बनाए रखने के लिए सुदर्शन चक्र से माता सती के शरीर के अंग अलग किए थे, जहां-जहां उनके अंग या आभूषण गिरे, वहां शक्तिपीठों की स्थापना हुई. त्रिकूट पर्वत पर माता सती का कंठ और गले का हार गिरा था. इसी वजह से इस स्थान को पहले 'माई हार' कहा जाता था, जो समय के साथ अपभ्रंश होकर 'मैहर' बन गया. हालांकि, यह नामकरण धार्मिक मान्यता और लोककथा से जुड़ा हुआ है.

आल्हा-ऊदल से जुड़ी है मंदिर की अनोखी परंपरा
मैहर के मां शारदा मंदिर की सबसे चर्चित मान्यताओं में आल्हा-ऊदल की कथा भी शामिल है. लोककथाओं के अनुसार, वीर योद्धा आल्हा मां शारदा के अनन्य भक्त थे और उन्हें माता से अमरत्व का वरदान प्राप्त हुआ था. ऐसी मान्यता है कि आल्हा आज भी मंदिर में सबसे पहले माता की पूजा करने आते हैं. मंदिर के पुजारियों और स्थानीय लोगों के बीच यह विश्वास लंबे समय से प्रचलित है कि सुबह मंदिर के पट खुलने पर माता का श्रृंगार और पूजा पहले से संपन्न मिलते हैं. श्रद्धालु इसे आल्हा की भक्ति से जोड़कर देखते हैं. 

नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा
शारदीय नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की आराधना की जाती है. पर्वतराज हिमालय की पुत्री होने के कारण उन्हें शैलपुत्री कहा जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, अपने पूर्वजन्म में वे राजा दक्ष की पुत्री सती थीं. मां शैलपुत्री का वाहन वृषभ यानी बैल है. उनके दाएं हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल सुशोभित रहता है. नवरात्रि की पूजा मां शैलपुत्री की आराधना से शुरू होती है. मान्यता है कि उनकी उपासना से साधक को मानसिक स्थिरता और आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त होती है. योग परंपरा में उनकी साधना को मूलाधार चक्र से भी जोड़ा जाता है.

लाल परिधान में हुआ मां शारदा का शृंगार
नवरात्रि के पहले दिन मां शारदा का लाल रंग के परिधान में विशेष शृंगार किया गया. मंदिर के प्रधान पुजारी पवन पांडेय ने श्रद्धालुओं को शारदीय नवरात्रि की शुभकामनाएं देते हुए मां से सभी के सुख-समृद्धि की कामना की. उन्होंने बताया कि नवरात्रि के नौ दिनों में देवी के नौ स्वरूपों की अलग-अलग विधियों से पूजा-अर्चना की जाती है. भक्त अपने घरों में भी कलश स्थापना और जवारों की स्थापना कर नौ दिनों तक मां की आराधना करते हैं. प्रधान पुजारी के अनुसार, मंदिर में सुबह मां को छप्पन भोग अर्पित किया जाता है. दोपहर में पूड़ी, हलवा, सब्जी, दाल और चावल सहित विभिन्न व्यंजनों का भोग लगाया जाता है. फल, फूल और मिठाइयां भी मां को समर्पित की जाती हैं.

मनोकामना पूरी होने की आस में पहुंच रहे श्रद्धालु
मां शारदा के दरबार में भक्त अपनी अलग-अलग मनोकामनाएं लेकर पहुंचते हैं. मान्यता है कि सच्चे मन से मां की आराधना करने वाले भक्तों को उनका आशीर्वाद मिलता है. कई श्रद्धालु मनोकामना पूरी होने के बाद दोबारा माता के दर्शन करने आते हैं. ऐसा ही एक श्रद्धालु वाराणसी से मैहर पहुंचा, जिसने अपने बेटे को सेना में नौकरी मिलने की कामना की थी. परिवार की मन्नत पूरी होने के बाद युवक मां शारदा के दर्शन करने आया. इस तरह की मान्यताएं मंदिर के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था को और मजबूत करती हैं.

सुरक्षा और सुविधाओं पर प्रशासन की नजर
नवरात्रि के दौरान बढ़ने वाली भीड़ को देखते हुए मैहर जिला प्रशासन सतर्क है. मंदिर परिसर और श्रद्धालुओं के आवागमन वाले मार्गों पर पुलिस बल तैनात किया गया है. अधिकारियों ने सुबह की आरती के दौरान व्यवस्थाओं का जायजा लिया और सुरक्षा तथा सुविधाओं को लेकर जरूरी इंतजाम किए. त्रिकूट पर्वत पर स्थित मां शारदा के दरबार में नवरात्रि के नौ दिनों तक श्रद्धालुओं की भीड़ रहने की संभावना है. आस्था, परंपरा और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ा यह मंदिर एक बार फिर मां के भक्तों के जयकारों से गूंज रहा है.


 

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