हिंदू धर्म में सावन महीने का विशेष महत्व है. इस माह से कांवड़ यात्रा शुरू होती है. इस महीने में कई व्रत और त्योहार पड़ते हैं. सावन माह के हर मंगलवार को मंगला गौरी व्रत (Mangala Gauri Vrat) रखा जाता है. इस बार सावन में कुल 4 मंगला गौरी व्रत पड़ रहे हैं. इस दिन मां गौरी के साथ भगवान शंकर और गणेश जी की पूजा-अर्चना करने का विशेष महत्व होता है.
इस दिन सुहागिन महिलाएं अखंड सौभाग्य और पति की लंबी आयु के लिए व्रत रखती हैं. ऐसी धार्मिक मान्यता है कि सावन में मंगला गौरी का व्रत रखने से अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है. पति की आयु लंबी होती है और वैवाहित जीवन खुशहाल रहता है. जिन कन्याओं का विवाह नहीं हो पाया है या जिनके विवाह में बाधाएं आ रही हैं, उनके लिए भी यह व्रत अत्यंत फलदायी माना जाता है. नवविवाहित महिलाओं के लिए मंगला गौरी का पहला व्रत मायके में रखना चाहिए. इसके बाद अगले 4 वर्षों तक इसे ससुराल में करना चाहिए. इस व्रत को लगातार 5 वर्षों तक करना शुभ माना गया है.
सावन 2026 में किस-किस दिन रखा जाएगा मंगला गौरी व्रत
पहला मंगला गौरी व्रत पर बन रहे तीन शुभ संयोग
इस साल सावन का पहला मंगला गौरी व्रत 4 अगस्त 2026 को रखा जाएगा. पहले मंगला गौरी व्रत पर तीन शुभ योग बन रहे हैं. इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग और रवि योग बनेगा. ये सभी योग 4 अगस्त की रात 9:54 बजे से शुरू होकर अगले दिन 5 अगस्त 2026 की सुबह 5:45 बजे तक रहेंगे. 4 अगस्त को धृति योग सुबह से लेकर शाम 7:33 बजे तक रहेगा. फिर शूल योग शुरू हो जाएगा. 4 अगस्त को रेवती नक्षत्र सुबह से रात 9:54 बजे तक रहेगा. इसके बाद अश्विनी नक्षत्र शुरू होगा. ये सभी योग पहला मंगला गौरी व्रत को और खास बना देते हैं.
दूसरे और चौथे मंगला गौरी व्रत पर कौन से बनेंगे शुभ संयोग
दूसरा मंगला गौरी व्रत 11 अगस्त 2026 को रखा जाएगा. 11 अगस्त को सावन शिवरात्रि का पर्व भी मनाया जाएगा. ऐसे में 11 अगस्त को मंगला गौरी व्रत और सावन शिवरात्रि का संयोग बनेगा. इसके साथ इस दिन सिद्धि योग का भी संयोग बनेगा. 25 अगस्त को चौथे मंगला गौरी व्रत के दिन भौम प्रदोष के व्रत का संयोग बनेगा.
मंगला गौरी व्रत के दिन कैसे करें पूजा