Shani Dev ka Peepal se Sambandh: पीपल का वृक्ष हिन्दू धर्म में सबसे पवित्र माना जाता है. मुख्य रूप से इसको भगवान विष्णु का स्वरुप मानते हैं. इसके पत्तों, टहनियों यहां तक कि कोपलों में भी देवी-देवताओं का वास माना जाता है. कहा जाता है कि पीपल के मूल में ब्रह्मा, मध्य में विष्णु और शीर्ष में शिव जी निवास करते हैं. शाखाओं, पत्तों और फलों में सभी देवताओं का निवास होता है. पीपल का पेड़ प्राकृतिक और आध्यात्मिक रूप से इतना महत्वपूर्ण है कि भगवान कृष्ण गीता में कहते हैं कि वृक्षों में मैं पीपल हूं.
पीपल के वृक्ष से शनि का क्या है संबंध
शनि देव को न्याय का देवता भी कहा जाता है. ये अच्छे कर्म करने वालों पर अपनी कृपा दृष्टि करते हैं और बुरे कर्म करने वालों को दंडित करते हैं. ज्योतिषि शैलेंद्र पांडेय ने बताया कि पीपल के वृक्ष के गुण शनि से काफी मिलते-जुलते हैं. इसके अलावा पीपल को शनि के ईष्ट श्री कृष्ण का स्वरुप माना जाता है. पीपल से सम्बन्ध रखने वाले पिप्पलाद मुनि ने ही शनि को दंड दिया था, तबसे माना जाता है कि पीपल की वृक्ष की पूजा करने से शनि की पीड़ा शांत होती है. पीपल के वृक्ष की उपासना किसी भी रूप में करने से शनि देव कृपा करते हैं. पीपल की पूजा करने या इसके नीचे दीपक जलाने से शनि देव प्रसन्न होते हैं और शनि के अशुभ प्रभाव या पीड़ा से मुक्ति मिलती है.
पीपल की पूजा से शनि की किन-किन समस्याओं में होता है लाभ
यदि अल्पायु का योग है तो वह योग समाप्त होता है. अगर रोग और लम्बी बीमारी का योग है तो वह भी दूर हो जाता है. वंश वृद्धि की समस्या और संतान की समस्याओं का निवारण हो जाता है. पीपल का वृक्ष लगाने और संरक्षण करने से शनि की दशाओं का नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता.
संतान प्राप्ति के लिए पीपल और शनि का क्या प्रयोग करें
एक पीपल का वृक्ष लगवाएं. उसमें जल डालें और उसकी रक्षा करें. हर शनिवार को पीपल के पास शनि मन्त्र का जाप करें.
शनि पीड़ा से मुक्ति के लिए क्या करें
पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल के दीपक हर शनिवार को जलाएं. इसके बाद वृक्ष की नौ बार परिक्रमा करें. ॐ शं शनैश्चराय नमः का जाप करें.
नियमित धन लाभ के लिए क्या करें
शनिवार को पीपल का एक पत्ता उठा लाएं. उस पर सुगंध लगाएं. पत्ते को अपने पर्स में रख लें. हर महीने पत्ते को बदल लें.
क्या शनि देव के मंत्र का जप घर में नहीं कर सकते
शनि देव के मंत्र का जप कहीं भी किया जा सकता है. सिर्फ पवित्रता और श्रद्धा के साथ मंत्र जप करना चाहिए. घर में शनि देव का चित्र या मूर्ति स्थापित न करें.