Shardiya Navratri 2026 Ashtami and Navami: इस समय शारदीय नवरात्रि पर पूरे देश में आस्था की बयार बह रही है. हिंदू पंचांग के मुताबिक शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर से हुई थी और इसका समापन 20 अक्टूबर 2026 को विजयादशमी यानी दशहरे के साथ होगा. शारदीय नवरात्रि में व्रत करने के बाद कन्या पूजन करने की परंपरा है. कुछ लोग अष्टमी और कुछ लोग नवमी के दिन कन्या पूजन करते हैं. आज हम आपको बता रहे हैं कि किस उम्र की कन्या के पूजन से क्या फल मिलता है और कितनी कन्याओं को भोजन करना चाहिए. इसके साथ ही हम यह भी बताएंगे इस बार कब है अष्टमी और नवमी?
मां दुर्गा का मिलता है आशीर्वाद
नवरात्रि में भक्त छोटी कन्याओं को मां दुर्गा का स्वरूप मानकर उनकी पूजा करते हैं. कन्याओं के पूजन से मां दुर्गा का आशीर्वाद मिलता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है. शास्त्रों के अनुसार कन्या पूजन के लिए दुर्गाष्टमी के दिन को सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण और शुभ माना गया है. नवरात्रि में यदि कोई भक्त किसी कारणवश नौ दिन व्रत नहीं कर पाएं हैं तो वे अष्टमी और नवमी में से किसी भी दिन व्रत कर सकते हैं. ऐसी धार्मिक मान्यता है कि दुर्गाष्टमी पर व्रत करने वालों को नौ दिन की पूजा के समान फल प्राप्त होता है. अष्टमी के दिन माता की आठवीं शक्ति मां महागौरी का पूजन होता है.
कब है अष्टमी-नवमी और क्या है कन्या पूजन के लिए शुभ मुहूर्त
इस बार शारदीय नवरात्रि में अष्टमी तिथि दो दिनों तक रहने के कारण महाष्टमी की सही तारीख को लेकर असमंजस है. यदि आप अष्टमी को कन्या पूजन की तैयारी कर रहे हैं तो आपको इससे पहले अष्टमी की सही तिथि और पूजा का शुभ मुहूर्त जान लेना चाहिए. पंचांग के मुताबिक आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि 18 अक्टूबर 2026 को सुबह 8 बजकर 27 मिनट से शुरू होगी और 19 अक्टूबर को सुबह 10 बजकर 51 मिनट तक रहेगी. उदया तिथि के आधार पर महाष्टमी का पर्व 19 अक्टूबर, दिन सोमवार को मनाया जाएगा. इस दिन मां दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी की पूजा-अर्चना की जाती है.
19 अक्टूबर को महाष्टमी पर कन्या पूजन के लिए शुभ मुहूर्त की बात करें तो ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:52 बजे से 5:40 बजे तक रहेगा. अमृत काल सुबह 7:28 बजे से 9:16 बजे तक रहेगा और अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:49 बजे से दोपहर 12:34 बजे तक रहेगा. आप इस मुहूर्त में कन्या पूजन कर सकते हैं. अब बात करते हैं महानवमी कब मनाई जाएगी? पंचांग के मुताबिक आश्विन शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि 19 अक्टूबर को सुबह 10 बजकर 51 मिनट से शुरू होकर 20 अक्टूबर को दोपहर 12 बजकर 50 मिनट तक रहेगी. उदया तिथि के आधार पर महानवमी 20 अक्टूबर, मंगलवार को मनाई जाएगी. इस दिन मां दुर्गा के नौवें स्वरूप मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है.
क्यों की जाती है दो बालकों की पूजा
कन्या पूजन में बच्चियों को घर बुलाकर उनके पैर धोकर मां की पसंद का खाना खिलाया जाता है. कन्या पूजन से दुख-दरिद्रता दूर होती है और घर में सुख-समृद्धि आती है. कन्या पूजन में नौ बालिकाओं के साथ दो बालकों को भी पूजा जाता है. इसके पीछे की कहानी ये है कि जहां बालिकाओं को माता रानी का स्वरूप माना जाता है, वहीं बालकों को भगवान गणेश और भैरव बाबा का रूप माना जाता है.
माता रानी के किस स्वरूप को मानकर की जाती है पूजा
देवी भगवत पुराण के अनुसार नवरात्रि में हमेशा 2 से 10 साल तक की उम्र की कन्याओं का पूजन करना चाहिए. 2 साल से छोटी कन्याओं को पूजन के लिए शुभ नहीं माना जाता है. नवरात्रि में भूलकर भी 10 वर्ष से अधिक की कन्या का पूजन नहीं करना चाहिए. 2 साल की कन्या को कुमारी, 3 साल की कन्या को त्रिमूर्ति, 4 वर्ष की कन्या को कल्याणी, 5 साल की कन्या को रोहिणी, 6 साल की कन्या को कलिका, 7 वर्ष की कन्या को चंडिका, 8 साल की कन्या को शाम्भवी, 9 साल की कन्या को दुर्गा और 10 साल की कन्या को सुभद्रा के रूप में पूजा जाता है.
किस उम्र की कन्या की पूजा से क्या मिलता है फल
जानें कन्या पूजन की विधि
कन्या पूजन के बाद खोल सकते हैं व्रत
नवरात्रि का व्रत रखने वाले कई श्रद्धालु कन्या पूजन के बाद नवरात्रि का व्रत खोलते हैं. कुछ घरों में हवन और नवमी की पूजा पूरी होने के बाद पारण किया जाता है. ऐसे में व्रत खोलने का समय अपनी परंपरा के अनुसार आप रख सकते हैं.