शारदीय नवरात्रि 11 अक्टूबर से शुरू हो रही है. नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा होगी और घरों से लेकर मंदिरों तक माता के स्वागत की तैयारियां दिखाई देंगी. कोई पूजा के लिए फूल खरीद रहा है, तो कोई मां के श्रृंगार के लिए चुनरी और सिंदूर ला रहा है. इन सबमें लाल रंग की चुनरी का अपना अलग महत्व है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि मां दुर्गा की पूजा में लाल रंग को ही इतनी खास जगह क्यों दी जाती है? इसके पीछे सिर्फ एक पुरानी परंपरा नहीं, बल्कि शक्ति, साहस, शुभता और मां के प्रति समर्पण से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं भी हैं.
मां दुर्गा को लाल रंग क्यों है प्रिय?
धार्मिक मान्यताओं में मां दुर्गा को आदिशक्ति का स्वरूप माना जाता है और लाल रंग को शक्ति, ऊर्जा, साहस और सौभाग्य का प्रतीक समझा जाता है. यही वजह है कि नवरात्रि में मां के श्रृंगार में लाल रंग की चुनरी, सिंदूर, रोली और फूलों का इस्तेमाल खास तौर पर देखने को मिलता है.
लाल रंग मां दुर्गा के उस स्वरूप से भी जुड़ा है, जो अन्याय और बुराई के खिलाफ खड़ा होता है. वहीं, यह रंग प्रेम, जीवन और सृजन का प्रतीक भी माना जाता है. इस तरह लाल रंग मां की शक्ति और ममता, दोनों भावों को दर्शाता है.
लाल चुनरी चढ़ाना सिर्फ श्रृंगार नहीं, श्रद्धा का है प्रतीक
मां दुर्गा को लाल चुनरी चढ़ाने के पीछे भक्तों की आस्था जुड़ी होती है. चुनरी को देवी को वस्त्र अर्पित करने और उनका श्रृंगार करने का एक तरीका माना जाता है. भक्त इसे मां के प्रति सम्मान और समर्पण के भाव से चढ़ाते हैं. कई श्रद्धालु चुनरी अर्पित करते समय परिवार की सुख-शांति, अच्छे स्वास्थ्य और जीवन में आने वाली परेशानियों से लड़ने की हिम्मत मांगते हैं. कुछ लोग अपनी मनोकामना पूरी होने पर आभार जताने के लिए भी मां को चुनरी चढ़ाते हैं. धार्मिक मान्यता के अनुसार, लाल चुनरी मां की कृपा और सुरक्षा की कामना का प्रतीक भी है.
सिंदूर से लेकर गुड़हल तक, लाल रंग की इन चीजों का भी है महत्व
नवरात्रि की पूजा में लाल रंग केवल चुनरी तक सीमित नहीं रहता. सिंदूर, रोली और लाल फूल भी पूजा की थाली का हिस्सा होते हैं. धार्मिक मान्यताओं में सिंदूर को सौभाग्य और मंगल का प्रतीक माना जाता है. वहीं, मां दुर्गा को गुड़हल का लाल फूल विशेष रूप से अर्पित किया जाता है. गुड़हल के गहरे लाल रंग को देवी के शक्तिशाली और उग्र स्वरूप से जोड़ा जाता है. भक्त फूल अर्पित करके अपनी श्रद्धा और भक्ति व्यक्त करते हैं. इन चीजों का महत्व केवल पूजा की सजावट में नहीं, बल्कि उनसे जुड़े धार्मिक भाव में भी है.
क्या मां दुर्गा को छोटी चुनरी भी चढ़ा सकते हैं?
मां के लिए चुनरी खरीदते समय कई लोगों के मन में सवाल आता है कि चुनरी बड़ी होनी चाहिए या छोटी. धार्मिक परंपराओं में ऐसा कोई एक नियम नहीं है, जो हर घर और मंदिर पर एक जैसा लागू हो. घर में मां की छोटी प्रतिमा या तस्वीर है, तो उसके आकार के हिसाब से छोटी चुनरी भी चढ़ाई जा सकती है. चुनरी ऐसी होनी चाहिए, जिसे प्रतिमा पर आसानी से रखा जा सके और जिससे मां का चेहरा या बाकी श्रृंगार ढके नहीं. ध्यान रखें की आस्था और भाव सबसे बड़ी पूजा है.
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