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Ram Mandir Ayodhya: राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से पहले तीन दिन तक अखंड पाठ करेंगे सिख समुदाय के लोग...क्या है गुरु नानक देव जी का राम से कनेक्शन

अयोध्या में 22 जनवरी को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की तैयारियां जोरों-शोरों से चल रही है. सिख समुदाय यहां तीन दिनों का अखंड पाठ करने वाला है. 19 जनवरी से 21 जनवरी तक अयोध्या में गुरुद्वारा ब्रह्म कुंड साहिब में तीन दिवसीय 'अखंड पाठ' का आयोजन होना है.

Ayodhya Ram Mandir will be inaugurated on January 22
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 17 जनवरी 2024,
  • अपडेटेड 11:55 AM IST

सिख समुदाय राम मंदिर की 'प्राण प्रतिष्ठा' से एक दिन पहले 19 जनवरी से 21 जनवरी तक अयोध्या में गुरुद्वारा ब्रह्म कुंड साहिब में तीन दिवसीय 'अखंड पाठ' का आयोजन करने के लिए तैयार है. बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आरपी सिंह ने कहा, "देश के विभिन्न हिस्सों से सिख 'अखंड पाठ' में भाग लेंगे. इसे 'प्राण प्रतिष्ठा' के लिए आयोजित किया जाएगा ताकि यह सुचारू रूप से चले."

उन्होंने आगे कहा, "सिखों, भगवान राम और अयोध्या के बीच संबंध का एक महान इतिहास है, प्रमुख साक्ष्य जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने भी भरोसा किया वह 1510 में गुरु नानक देव जी की राम मंदिर की यात्रा थी. निहंग 1858 में राम मंदिर के अंदर भी गए थे जहां उन्होंने हवन किया और परिसर के अंदर दीवार पर 'राम' लिखा."

क्या है अखंड पाठ
'अखंड पथ', सिख धर्म में एक मौलिक अनुष्ठान है, जिसका गहरा आध्यात्मिक महत्व है. इसमें सिखों की पवित्र पुस्तक गुरु ग्रंथ साहिब का अखंड, निरंतर पाठ किया जाता है. यह पाठ 48 घंटे से अधिक समय तक चलता है. इस पूरे पाठ में एक टीम बैठती है और यह तय करती है कि समारोह के समापन तक दिव्य धर्मग्रंथ के शब्द बिना किसी रुकावट के गूंजते रहें.

गुरु ग्रंथ साहिब में भी राम शब्द का इस्तेमाल
आरपी सिंह ने कहा कि 2019 में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले में सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले से पहले 'अखंड पाठ' और विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया था. उन्होंने कहा, "राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले, हमने अयोध्या के उसी गुरुद्वारे में 'अखंड पाठ' का आयोजन किया था. इसमें कानपुर, हैदराबाद, अमृतसर और देश के अन्य हिस्सों से सिखों ने भाग लिया और राम मंदिर के निर्माण के लिए प्रार्थना की. यह 'अखंड' पथ' प्राण प्रतिष्ठा के लिए है, और गुरु ग्रंथ साहिब में 'राम' शब्द का इस्तेमाल 2,533 बार किया गया है.'' 

'अखंड पथ' का आयोजन करके, सिख समुदाय का उद्देश्य न केवल अंतरधार्मिक एकजुटता प्रदर्शित करना है, बल्कि धर्म की सीमाओं से परे आस्था और आध्यात्मिकता की जीत का जश्न मनाना भी है.


 

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