Jagannath Rath Yatra 2026: दिव्य स्नान के बाद अस्वस्थ हो जाते हैं भगवान जगन्नाथ, 15 दिन तक नहीं देंगे दर्शन, क्या हैं मान्यताएं?

पुरी में मान्यता है कि ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिव्य स्नान के बाद भगवान अस्वस्थ हो जाते हैं और लगभग 15 दिनों तक भक्तों को दर्शन नहीं देते. इसके बाद भगवान नवयौवन स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं और फिर भव्य रथ यात्रा के साथ अपने भक्तों के बीच निकलते हैं.

Jagannath Rath Yatra 2026
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 29 जून 2026,
  • अपडेटेड 7:46 PM IST

विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा का शंखनाद हो गया है. यात्रा से पहले आज का दिन यानी ज्येष्ठ पूर्णिमा का दिन बेहद खास होता है. परंपरा के अनुसार देव स्नान पूर्णिमा या जगन्नाथ स्नान यात्रा का आयोजन किया जाता है, जिसमें भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा का 108 पवित्र कलशों के जल से महाअभिषेक किया जाता है. पुरी में मान्यता है कि ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिव्य स्नान के बाद भगवान अस्वस्थ हो जाते हैं और लगभग 15 दिनों तक भक्तों को दर्शन नहीं देते. इसके बाद भगवान नवयौवन स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं और फिर भव्य रथ यात्रा के साथ अपने भक्तों के बीच निकलते हैं.

दिव्य स्नान महोत्सव में क्या होता है?
ज्येष्ठ महीने की पूर्णिमा पर भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई भगवान बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा का दिव्य स्नान महोत्सव होते हैं. इस दिन पूरे विधि-विधान के साथ देव स्नान होता है. जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं.

महाभिषेक के बाद भगवान जगन्नाथ का दिव्य श्रृंगार किया जाता है. रंग-बिरंगे वस्त्रों, आभूषणों और पुष्पों से सजे भगवान स्नान पूर्णिमा पर 'गजवेश' धारण करते हैं, जिसके दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है.

क्या हैं मान्यताएं?
दिव्य स्नान उत्सव के साथ ही भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा से जुड़ी एक बेहद अनूठी परंपरा की भी शुरुआत होती है. अब भगवान अगले 15 दिनों तक भक्तों को दर्शन नहीं देंगे. मान्यता है कि 16 जुलाई को निकलने वाली विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा से पहले भगवान एकांतवास में चले जाते हैं और इसी दौरान श्रीमंदिर के कपाट भी श्रद्धालुओं के लिए बंद कर दिए जाते हैं.

धार्मिक मान्यता के अनुसार, 108 कलशों के पवित्र जल से महाभिषेक के बाद भगवान जगन्नाथ को बुखार हो जाता है. इसलिए उन्हें विश्राम के लिए विशेष कक्ष में ले जाया जाता है. इस 15 दिवसीय अवधि को 'अनासर' या 'अनवासर काल' कहा जाता है. इस दौरान भगवान अनासर घर में एकांतवास करेंगे, जहां परंपरागत विधि से उनका उपचार किया जाएगा. मान्यता है कि इसी उपचार के बाद भगवान पूरी तरह स्वस्थ होते हैं और अगले दिन यानी 15 जुलाई को भगवान पहली बार अपने नवयौवन स्वरूप में भक्तों को दर्शन देंगे. इसके ठीक अगले दिन, यानी 16 जुलाई को, भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा अपने-अपने भव्य रथों पर विराजमान होकर श्रीमंदिर से गुंडिचा मंदिर की ओर प्रस्थान करेंगे.

यही वो ऐतिहासिक और विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ रथ यात्रा है, जिसमें लाखों श्रद्धालु भगवान के रथों को खींचने का सौभाग्य हासिल करने के लिए उमड़ते हैं.

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