Badrinath Dham Story: कभी बद्रीनाथ हुआ करता था महादेव और मां पार्वती का धाम, भगवान विष्णु ने छल से मांग लिया उनका घर... जानें क्या है इसके पीछे की कथा

बदरीनाथ धाम कभी भगवान शिव और माता पार्वती का निवास हुआ करता था. कथा है कि भगवान विष्णु ने छल से ये जगह उनसे मांग लिया. जिसके बाद शिव-पार्वती को ये स्थान छोड़ना पड़ा.

बदरीनाथ धाम कथा
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 08 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 12:16 PM IST

आज बद्रीनाथ धाम को भगवान विष्णु के सबसे पवित्र चार धामों में गिना जाता है, लेकिन पौराणिक मान्यताओं के अनुसार एक समय ऐसा भी था जब यह स्थान भगवान शिव और माता पार्वती का निवास हुआ करता था. हिमालय की शांत वादियों के बीच स्थित यह स्थान शिव-पार्वती के तप, ध्यान और एकांत का प्रिय धाम माना जाता था. दोनों यहां लंबे समय तक निवास करते थे और कैलाश जाने से पहले भी इस स्थान पर समय बिताते थे.

माता लक्ष्मी की सलाह पर भगवान विष्णु ने रची लीला
कथा के अनुसार, भगवान विष्णु भी हिमालय की इसी पवित्र भूमि पर कठोर तपस्या करना चाहते थे. लेकिन जिस स्थान को उन्होंने चुना, वहां पहले से भगवान शिव और माता पार्वती का निवास था. ऐसे में माता लक्ष्मी ने भगवान विष्णु से कहा कि यदि उन्हें इसी स्थान पर तप करना है, तो उन्हें कोई ऐसी लीला करनी होगी जिससे शिव-पार्वती स्वयं यह स्थान छोड़ दें. इसके बाद भगवान विष्णु ने एक छोटे बालक का रूप धारण किया और बदरीनाथ में बैठकर जोर-जोर से रोने लगे.

जब भगवान शिव और माता पार्वती ने उस मासूम बालक के रोने की आवाज सुनी, तो दोनों उसके पास पहुंचे. माता पार्वती का हृदय उस रोते हुए बच्चे को देखकर द्रवित हो गया. उन्होंने उसे गोद में उठाया और प्यार से पूछा कि वह कौन है और यहां अकेला क्यों बैठा है. बालक बने भगवान विष्णु ने कोई उत्तर नहीं दिया, बल्कि लगातार रोते रहे. माता पार्वती ने सोचा कि इतने छोटे बच्चे को इस बर्फीले क्षेत्र में अकेला छोड़ना उचित नहीं है. उन्होंने भगवान शिव से कहा कि कुछ समय के लिए इस बालक को अपने आश्रय में रख लेना चाहिए. हालांकि भोलेनाथ विष्णु भगवान के इस लीला को समझ चुके थे. उन्होंने माता पार्वती को संकेत भी दिया था, लेकिन बालक को रोता देख मां कुछ समझ नहीं पाई और ममतामय हो गईं. 

शिव-पार्वती के बाहर जाते ही बदल गया सब कुछ
कुछ समय बाद भगवान शिव और माता पार्वती स्नान के लिए पास के गर्म जलकुंड की ओर चले गए. जब वे लौटकर अपने निवास स्थान पर पहुंचे, तो देखा कि द्वार भीतर से बंद है. भगवान शिव ने दरवाजा खोलने के लिए आवाज लगाई, लेकिन तभी भीतर से भगवान विष्णु अपने वास्तविक स्वरूप में प्रकट हुए. उन्होंने विनम्रता से कहा कि अब उन्होंने इस स्थान को अपनी तपस्या के लिए चुन लिया है और यही उनका निवास रहेगा. भगवान शिव तो सब जानते ही थे कि यह सब भगवान विष्णु की दिव्य लीला थी. उन्होंने किसी प्रकार का विरोध नहीं किया और मुस्कुराते हुए इस स्थान को भगवान विष्णु को समर्पित कर दिया.

फिर कहां गए भगवान शिव और मां पार्वती?
बद्रीनाथ धाम छोड़ने के बाद भगवान शिव और माता पार्वती उत्तर दिशा की ओर बढ़े और अंततः कैलाश पर्वत को अपना स्थायी निवास बनाया. इसके बाद कैलाश भगवान शिव का प्रमुख धाम माना जाने लगा, जबकि बद्रीनाथ भगवान विष्णु की तपोभूमि और प्रमुख वैष्णव तीर्थ बन गया. मान्यता है कि भगवान विष्णु ने इसी स्थान पर हजारों वर्षों तक तपस्या की. तप के दौरान माता लक्ष्मी ने बदरी (जंगली बेर) के वृक्ष का रूप धारण कर उन्हें धूप, बर्फ और वर्षा से बचाया. इसी कारण इस स्थान का नाम बदरीनाथ पड़ा, अर्थात बदरी वन के स्वामी.

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