International Yoga Day 2026: भगवान श्रीकृष्ण ने गीता में मनुष्य के कल्याण के लिए तीन योग मार्ग बताए हैं, न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक शांति का है ये महामंत्र

बिना ज्ञान के कर्म अंधा है, बिना कर्म के ज्ञान अपंग है, और बिना भक्ति (प्रेम/समर्पण) के ज्ञान और कर्म दोनों नीरस और अहंकारी हो सकते हैं. जानें भगवान श्रीकृष्ण ने इसे कैसे समझाया है.

International Yoga Day 2026
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 21 जून 2026,
  • अपडेटेड 8:21 AM IST

भगवान श्रीकृष्ण ने श्रीमद्भगवद्गीता में मनुष्य के लिए तीन प्रमुख आध्यात्मिक योग मार्ग बताए हैं, कर्मयोग, भक्तियोग और ज्ञानयोग. तीनों का लक्ष्य एक ही है, लेकिन तीनों ही योग मार्ग ईश्वर तक पहुंचने का अलग-अलग तरीका बताता है. कोई सेवा और कर्म के जरिए ईश्वर तक पहुंचता है, कोई प्रेम और भक्ति के जरिए, तो कोई ज्ञान और आत्मचिंतन के माध्यम से ईश्वर का स्पर्श करता है. गीता के ये तीन योग मार्ग न केवल शारीरिक तौर पर स्वस्थ रखते हैं बल्कि मानसिक शांति देने का भी काम करते हैं. जानें क्या है तीनों योग और उनमें का फर्क.  

कर्मयोग क्या है?
कर्मयोग का अर्थ है बिना फल की इच्छा किए अपने कर्तव्यों का पालन करना. इसमें व्यक्ति अपना हर काम ईश्वर को समर्पित भाव से करता है.

कैसे करें कर्मयोग?
अपने काम को पूरी ईमानदारी से करें.
सफलता और असफलता दोनों को समान भाव से स्वीकार करें.
सेवा, दान और दूसरों की मदद को जीवन का हिस्सा बनाएं.
कर्म करें, लेकिन उसके परिणाम को लेकर चिंता न करें.
सबसे जरूरी है निस्वार्थ भाव का होना.

कर्मयोग का फल
मन में स्थिरता आती है.
तनाव और चिंता कम होती है.
अहंकार धीरे-धीरे समाप्त होने लगता है.
व्यक्ति कर्तव्यनिष्ठ और संतुलित बनता है.

भक्तियोग क्या है?
भक्तियोग प्रेम, समर्पण और भगवान पर विश्वास बनाए रखने का मार्ग है, चाहे परिस्थिति कुछ भी हो. इसमें साधक ईश्वर को अपना सबसे निकट मानकर उनसे जुड़ता है.

कैसे करें भक्तियोग?
रोज भगवान का स्मरण करें.
मंत्र जाप, भजन और कीर्तन करें.
पूजा के समय केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि भाव रखें.
हर परिस्थिति में ईश्वर पर विश्वास बनाए रखें.

भक्तियोग का फल
मन को शांति मिलती है.
भय और अकेलापन कम होता है.
हृदय में प्रेम और करुणा बढ़ती है.
ईश्वर से गहरा भावनात्मक संबंध बनता है.

ज्ञानयोग क्या है?
ज्ञानयोग आत्मा, परमात्मा और जीवन के सत्य को समझने का मार्ग है. इसमें व्यक्ति प्रश्न करता है, चिंतन करता है और सत्य की खोज करता है.

कैसे करें ज्ञानयोग?
गीता, उपनिषद और अन्य आध्यात्मिक ग्रंथों का अध्ययन करें. फिर उसे उसके मुल रूप में समझने की कोशिश करें.
प्रतिदिन आत्मचिंतन करें.
'मैं कौन हूं? और यहां क्यों आया हूं' जैसे प्रश्नों पर मनन करें.
अनुभवी गुरु के मार्गदर्शन में अध्ययन करें.

ज्ञानयोग का फल
अज्ञान दूर होता है.
जीवन और मृत्यु के भय में कमी आती है.
आत्मबोध की दिशा में प्रगति होती है.
विवेक और निर्णय क्षमता मजबूत होती है.

शुरुआत कैसे करें?
अगर कोई व्यक्ति आज से साधना शुरू करना चाहता है, तो सबसे आसान तरीका तीनों का संतुलन बनाना है. इतना ही नहीं तीनों को तरीका भले अलग हो, लेकिन तीनों का मकसद भगवान को समझ कर उनसे जुड़ना है. भक्तियोग को समझने के लिए सुबह 5 मिनट भगवान का स्मरण करें. कर्मयोग से भगवान को पाने के लिए हर दिन अपना काम पूरी निष्ठा और निस्वार्थ भाव से करें. ज्ञान योग के रास्ते पर चलने के लिए रात में 10 मिनट गीता का एक श्लोक पढ़कर उसका अर्थ समझें. ऐसे शुरूआत करना फायदेमंद होता है.

क्या तीनों को एक साथ साधा जा सकता है?
हां. भगवान कृष्ण ने तीनों योग को खूबसूरती से समझाया है. मान लीजिए हमारा शरीर एक रथ है. ज्ञानयोग उस रथ की हेडलाइट है जो हमें सही और गलत का रास्ता दिखाती है. भक्तियोग उस रथ का फ्यूल (ईंधन) या इंजन है जो हमें आगे बढ़ने की प्रेरणा और प्रेम की ऊर्जा देता है. और कर्मयोग उस रथ के पहिए हैं जो वास्तव में हमें मंजिल तक ले जाते हैं. अगर तीनों को साथ लेकर चले तो न केवल हमें मानसिक शांति मिलती है बल्कि ईश्वर की प्राप्ति भी होती है. थोड़ा समय लगेगा लेकिन तीनों पर नियंत्रण करना आसान है थोड़े प्रयास के बाद. 

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