गणेश उत्सव के दौरान देशभर में भव्य और आकर्षक पंडाल देखने को मिलते हैं. कहीं लाखों तो कहीं करोड़ों रुपये खर्च कर पंडाल सजाए जाते हैं. सोने-चांदी से सजी गणेश प्रतिमाएं और रंग-बिरंगी रोशनी लोगों का ध्यान खींचती हैं. लेकिन गुजरात के सूरत शहर से कुछ दूर सरोली गांव में बना गणेश पंडाल इन सबसे बिल्कुल अलग है. यहां न महंगी सजावट है और न ही दिखावे की चमक-दमक. इसकी खासियत है गांव की सादगी और पुराने दौर की यादों को जीवंत करती थीम.
पंडाल में कदम रखते ही लगेगा जैसे गांव पहुंच गए
सूरत के सरोली इलाके में हैप्पी क्लब ने गणेश उत्सव के लिए गांव की थीम पर यह खास पंडाल तैयार किया है. पंडाल में प्रवेश करते ही ऐसा लगता है, जैसे शहर से निकलकर किसी पुराने गांव में पहुंच गए हों. यहां गांव की गलियां, कच्चे मकान, बैलगाड़ी, कुआं, तालाब, पेड़-पौधे और पुराने समय के जीवन से जुड़ी कई चीजें दिखाई देती हैं.
पंडाल में सबसे पहले बैलगाड़ी नजर आती है. आगे बढ़ने पर कच्चे मकानों का दृश्य दिखाई देता है. इन घरों के अंदर उस दौर में इस्तेमाल होने वाला सामान भी रखा गया है. यानी सिर्फ घरों का मॉडल नहीं बनाया गया, बल्कि पुराने गांव की पूरी जिंदगी को दिखाने की कोशिश की गई है.
कुआं, तालाब और बैलगाड़ी ने बढ़ाई थीम की खूबसूरती
गांव की थीम में एक तालाब भी बनाया गया है, जिसमें मछलियां तैरती हुई दिखाई देती हैं. इसके अलावा पानी के पुराने साधन रहे कुएं को भी पंडाल का हिस्सा बनाया गया है. यहां बाल्टी के जरिए कुएं से पानी निकालने की पुरानी व्यवस्था को भी दिखाया गया है. पंडाल में कहीं गाय बंधी हुई नजर आती हैं तो कहीं पुरानी साइकिलें दिखाई देती हैं. पुराने जमाने में इस्तेमाल होने वाली स्कूटी को भी इस थीम में शामिल किया गया है. पेड़-पौधों और हरियाली ने पूरे पंडाल को गांव जैसा माहौल दे दिया है.
चूल्हे से लेकर टेप रिकॉर्डर तक, सब कुछ दिलाता है पुराने दौर की याद
पंडाल में बनाए गए पुराने घरों के अंदर रखी चीजें खास आकर्षण का केंद्र हैं. कमरों में चूल्हा, तवा, पुराने बर्तन, टेप रिकॉर्डर, कैसेट, टेलीफोन और रोजमर्रा की जिंदगी में इस्तेमाल होने वाली कई पुरानी वस्तुएं रखी गई हैं. आज मोबाइल फोन और इंटरनेट हमारी जिंदगी का हिस्सा हैं. ऐसे में टेप रिकॉर्डर, कैसेट और पुराने टेलीफोन देखकर लोगों को वह दौर याद आ रहा है, जब मनोरंजन और बातचीत के साधन बेहद सीमित हुआ करते थे.
बड़ी सजावट के बीच गणेश प्रतिमा बेहद सादगीपूर्ण
इस पंडाल की सबसे खास बात यह है कि पूरा पंडाल काफी बड़ा और विस्तृत बनाया गया है, लेकिन भगवान गणेश की प्रतिमा अपेक्षाकृत छोटी और बेहद सादगीपूर्ण है. आयोजकों ने पंडाल की सजावट को प्राकृतिक गांव के वातावरण के अनुरूप रखा है. यहां पेड़-पौधे, हरियाली और छोटे-छोटे पक्षियों को भी दिखाया गया है. पंडाल के जरिए यह बताने की कोशिश की गई है कि कुछ दशक पहले गांवों में लोगों की जिंदगी कैसी हुआ करती थी.
नई पीढ़ी के लिए बना पुराने गांव की जिंदगी देखने का मौका
यह पंडाल सिर्फ गणेश दर्शन तक सीमित नहीं है. यह नई पीढ़ी को पुराने गांव और उसकी जीवनशैली से परिचित कराने की कोशिश भी करता है. जिन लोगों ने गांव का जीवन करीब से देखा है, उनके लिए यहां रखी चीजें पुरानी यादें ताजा कर रही हैं. वहीं बच्चों और नई पीढ़ी के लिए चूल्हा, कुआं, बैलगाड़ी, टेलीफोन और कैसेट जैसी चीजें एक अलग अनुभव दे रही हैं.
शहर की भागदौड़ के बीच गांव की याद दिला रहा पंडाल
गणेश उत्सव के दौरान जहां एक ओर बड़े-बड़े पंडाल अपनी भव्य रोशनी और महंगी सजावट के लिए चर्चा में हैं, वहीं सरोली का यह पंडाल अपनी सादगी के कारण लोगों का ध्यान खींच रहा है. यहां पहुंचने वाले लोगों को गणेश दर्शन के साथ पुराने घर, कुआं, तालाब, बैलगाड़ी और गांव के पारंपरिक जीवन की झलक देखने को मिल रही है. कई लोगों के लिए यह पंडाल कुछ देर के लिए शहर की भागदौड़ से दूर अपने पुराने गांव में लौटने जैसा अनुभव दे रहा है.
ये भी पढ़ें: