दीपावली से एक दिन पहले नरक चतुर्दशी का त्योहार मनाया जाता है. इसे छोटी दिवाली और नरक निवारण चतुर्दशी के नाम से भी जाना जाता है. हिंदू धर्म में इस दिन का विशेष महत्व है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर का वध करके लोगों को उसके अत्याचारों से मुक्ति दिलाई थी. इस दिन यमराज की पूजा भी की जाती है. मान्यता है कि नरक चतुर्दशी पर कुछ खास उपाय करने से लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुंदरता का आशीर्वाद मिलता है.
नरक चतुर्दशी का क्या है महत्व?
नरक चतुर्दशी का संबंध अच्छी सेहत, लंबी उम्र और सुंदरता से जुड़ा है. इस दिन यमराज की पूजा करने और उनके नाम का दीपक जलाने की परंपरा है. मान्यता है कि ऐसा करने से अकाल मृत्यु का डर दूर होता है. वहीं, इस दिन भगवान श्रीकृष्ण की पूजा भी की जाती है. कुछ जगहों पर छोटी दिवाली के दिन हनुमान जी का जन्मोत्सव भी मनाया जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन पूजा और विशेष उपाय करने से जीवन की परेशानियां दूर होती हैं.
छोटी दिवाली पर स्नान करने का क्या है महत्व?
नरक चतुर्दशी पर स्नान करना बहुत शुभ माना जाता है. इस दिन सुबह या शाम को चंद्रमा की रोशनी में स्नान करने की परंपरा है. स्नान के लिए ताजे या ठंडे पानी का इस्तेमाल करना चाहिए. इस दिन शरीर पर विशेष उबटन लगाकर स्नान करना भी शुभ माना जाता है. धार्मिक मान्यता है कि ऐसा करने से सुंदरता बढ़ती है और स्वास्थ्य अच्छा रहता है. स्नान के बाद घर में दीपदान जरूर करना चाहिए.
लंबी उम्र के लिए ऐसे जलाएं यम दीपक
नरक चतुर्दशी पर यमराज के नाम से दीपक जलाने की परंपरा है. इसे यम दीपदान कहा जाता है. मान्यता है कि इससे परिवार के लोगों को लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य का आशीर्वाद मिलता है. इसके लिए घर के मुख्य दरवाजे के बाईं ओर अनाज की छोटी ढेरी बनाएं. इसके ऊपर सरसों के तेल का एक मुखी दीपक रखें. दीपक का मुख दक्षिण दिशा की ओर होना चाहिए. इसके बाद दीपक के पास फूल और जल चढ़ाएं. यमराज से परिवार की सुख-शांति और अच्छी सेहत की प्रार्थना करें.
छोटी दिवाली पर हनुमान जी की पूजा कैसे करें?
कुछ स्थानों पर नरक चतुर्दशी के दिन हनुमान जी की विशेष पूजा की जाती है. इस दिन शाम को हनुमान मंदिर जाकर उन्हें लाल वस्त्र चढ़ाना शुभ माना जाता है. धार्मिक मान्यता है कि इससे मुकदमे और विवादों से मुक्ति पाने में मदद मिलती है. घर में पूजा करते समय हनुमान जी के सामने घी का दीपक जलाएं. उन्हें तुलसी के पत्ते डालकर लड्डुओं का भोग लगाएं. सबसे पहले भगवान श्रीराम का स्मरण करें और फिर हनुमान जी की पूजा करें. इसके बाद हनुमान मंत्रों का जाप करें या कम से कम तीन बार हनुमान चालीसा का पाठ करें. अंत में हनुमान जी से सुख, शांति और संकटों से रक्षा की प्रार्थना करें.