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नया घर बनवाने से पहले जान लें ये जरूरी वास्तु नियम, छोटी गलती भी बिगाड़ सकती है सुख-शांति

अपना घर बनाना हर परिवार का सपना होता है. घर सिर्फ रहने की जगह नहीं बल्कि परिवार की खुशियों, शांति और तरक्की से भी जुड़ा माना जाता है. यही वजह है कि आज भी बड़ी संख्या में लोग नया घर बनवाते समय वास्तु शास्त्र के नियमों का ध्यान रखते हैं.

Vastu tips for home
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 23 मई 2026,
  • अपडेटेड 12:34 PM IST

अपना घर बनाना हर परिवार का सपना होता है. घर सिर्फ रहने की जगह नहीं बल्कि परिवार की खुशियों, शांति और तरक्की से भी जुड़ा माना जाता है. यही वजह है कि आज भी बड़ी संख्या में लोग नया घर बनवाते समय वास्तु शास्त्र के नियमों का ध्यान रखते हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक डिजाइन और सुंदरता के चक्कर में कई लोग ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जो बाद में मानसिक तनाव, आर्थिक परेशानी और घर के माहौल पर असर डाल सकती हैं. ऐसे में घर निर्माण से पहले कुछ जरूरी वास्तु नियमों को समझना बेहद जरूरी है.

प्लॉट की दिशा और आकार का रखें ध्यान
वास्तु शास्त्र में प्लॉट की दिशा और आकार को बहुत महत्वपूर्ण माना गया है. वर्गाकार और आयताकार प्लॉट सबसे अच्छे माने जाते हैं क्योंकि ये स्थिरता और संतुलन का प्रतीक होते हैं. वहीं टेढ़े-मेढ़े या नुकीले कोनों वाले प्लॉट को अशुभ माना जाता है. इसके अलावा उत्तर और पूर्व दिशा वाले प्लॉट को सकारात्मक ऊर्जा देने वाला माना जाता है.

मुख्य दरवाजा सही दिशा में होना जरूरी
मुख्य प्रवेश द्वार घर में ऊर्जा के प्रवेश का रास्ता माना जाता है. वास्तु के अनुसार उत्तर, पूर्व और उत्तर-पूर्व दिशा में बना मुख्य दरवाजा शुभ माना जाता है. दरवाजे के सामने किसी तरह का भारी सामान, खंभा या रुकावट नहीं होनी चाहिए क्योंकि इससे सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह प्रभावित होता है.

रसोईघर की गलत दिशा बन सकती है परेशानी
रसोई को अग्नि तत्व से जुड़ा माना जाता है. वास्तु विशेषज्ञों के मुताबिक घर की रसोई दक्षिण-पूर्व दिशा में बनाना सबसे अच्छा माना जाता है. दूसरी बेहतर दिशा उत्तर-पश्चिम होती है. वहीं उत्तर-पूर्व दिशा में रसोई बनवाना बड़ी वास्तु गलती मानी जाती है. खाना बनाते समय गैस चूल्हे का मुख पूर्व दिशा की ओर होना शुभ माना जाता है.

बेडरूम और बच्चों के कमरे की सही जगह
वास्तु शास्त्र के अनुसार मास्टर बेडरूम उत्तर-पूर्व दिशा में नहीं होना चाहिए. परिवार के मुखिया का कमरा दक्षिण-पश्चिम दिशा में सबसे अच्छा माना जाता है क्योंकि यह स्थिरता और मजबूती का प्रतीक है. बच्चों और मेहमानों के कमरे पश्चिम या उत्तर-पश्चिम दिशा में बनाना बेहतर माना जाता है.

उत्तर-पूर्व कोना रखें साफ और खुला
घर का उत्तर-पूर्व हिस्सा सबसे पवित्र माना जाता है. इस स्थान पर भारी निर्माण, स्टोर रूम, सीढ़ियां या टॉयलेट बनवाना वास्तु दोष माना जाता है. विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि इस हिस्से को साफ, खुला और रोशनी वाला रखना चाहिए. कई लोग इसी दिशा में पूजा या ध्यान का कमरा भी बनवाते हैं.

टॉयलेट और सीढ़ियों की गलत जगह से बचें
वास्तु के अनुसार घर के बीचों-बीच या उत्तर-पूर्व दिशा में टॉयलेट नहीं होना चाहिए. इसके लिए उत्तर-पश्चिम और पश्चिम दिशा बेहतर मानी जाती है. वहीं घर के केंद्र यानी ब्रह्मस्थान में सीढ़ियां बनवाना भी बड़ी गलती माना जाता है. सीढ़ियों के लिए दक्षिण, पश्चिम या दक्षिण-पश्चिम दिशा को सही माना जाता है.

रोशनी और हवा बेहद जरूरी
आजकल छोटे और आधुनिक घरों में कई बार धूप और वेंटिलेशन पर कम ध्यान दिया जाता है. लेकिन वास्तु शास्त्र में प्राकृतिक रोशनी और ताजी हवा को बहुत जरूरी माना गया है. खासकर पूर्व दिशा से आने वाली धूप घर में सकारात्मक ऊर्जा लाती है. अंधेरे और बंद घरों को नकारात्मक ऊर्जा का कारण माना जाता है.

पानी की टंकी और शुभ मुहूर्त का भी रखें ध्यान
वास्तु के अनुसार भूमिगत पानी की टंकी उत्तर-पूर्व दिशा में और ओवरहेड टैंक दक्षिण-पश्चिम दिशा में होना बेहतर माना जाता है. इसके अलावा कई परिवार घर निर्माण शुरू करने से पहले भूमि पूजन और शुभ मुहूर्त का भी ध्यान रखते हैं. माना जाता है कि शुभ समय में शुरू किया गया निर्माण घर में सुख-समृद्धि और शांति लाता है.

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