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Vishwakarma Jayanti 2026: कब है विश्वकर्मा जयंती? जानें तारीख, पूजा का शुभ मुहूर्त और मशीन-औजारों की पूजा करने की सही विधि

भगवान विश्वकर्मा को देवताओं का इंजीनियर कहा जा सकता है. यही कारण है कि विश्वकर्मा जयंती पर कारखानों, दुकानों और कार्यस्थलों पर मशीनों, औजारों और वाहनों की पूजा की जाती है. ऐसे में चलिए आपको बताते हैं कि विश्वकर्मा जयंती कब मनाई जाएगी और विश्वकर्मा जयंती पर पूजा के नियम क्या हैं.

vishwakarma Puja 2026
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 10 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 3:00 PM IST

हिंदू धर्म में भगवान विश्वकर्मा को देवताओं का शिल्पकार और वास्तुकार माना जाता है. मान्यता है कि उन्होंने देवताओं के लिए भव्य महलों से लेकर कई दिव्य अस्त्र-शस्त्रों का निर्माण किया था. इसी वजह से उन्हें निर्माण और शिल्प कला का जनक भी कहा जाता है. आज के समय से जोड़कर देखें तो भगवान विश्वकर्मा को देवताओं का इंजीनियर कहा जा सकता है. यही कारण है कि विश्वकर्मा जयंती पर कारखानों, दुकानों और कार्यस्थलों पर मशीनों, औजारों और वाहनों की पूजा की जाती है. ऐसे में चलिए आपको बताते हैं कि विश्वकर्मा जयंती कब मनाई जाएगी और विश्वकर्मा जयंती पर पूजा के नियम क्या हैं.

कब मनाई जाएगी विश्वकर्मा जयंती 2026
विश्वकर्मा पूजा हर साल कन्या संक्रांति के दिन मनाई जाती है. कन्या संक्रांति उस दिन को कहा जाता है, जब सूर्य देव कन्या राशि में प्रवेश करते हैं. इस साल सूर्य 17 सितंबर 2026 को कन्या राशि में प्रवेश करेंगे. ऐसे में इसी दिन विश्वकर्मा जयंती मनाई जाएगी और भगवान विश्वकर्मा की पूजा की जाएगी.

विश्वकर्मा पूजा 2026 का शुभ मुहूर्त
17 सितंबर को विश्वकर्मा पूजा के लिए दोपहर का समय शुभ माना गया है. इस दिन चौघड़िया के अनुसार पूजा के लिए ये मुहूर्त रहेंगे.
चल चौघड़िया: सुबह 10:43 बजे से दोपहर 12:16 बजे तक. इसे सामान्य मुहूर्त माना जाता है.
लाभ चौघड़िया: दोपहर 12:16 बजे से 1:48 बजे तक. यह उत्तम मुहूर्त है.
अमृत चौघड़िया: दोपहर 1:48 बजे से 3:20 बजे तक. इसे भी उत्तम मुहूर्त माना गया है.

ऐसे करें भगवान विश्वकर्मा की पूजा
विश्वकर्मा पूजा के दिन सबसे पहले पूजा स्थल और कार्यस्थल की अच्छी तरह सफाई करें. इसके बाद भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा स्थापित करें और कलश की स्थापना करें. हाथ में अक्षत और जल लेकर पूजा का संकल्प लें. इसके बाद भगवान विश्वकर्मा को जल, अक्षत, रोली, फूल और मिठाई अर्पित करें. इसके साथ ही कार्यस्थल पर इस्तेमाल होने वाली मशीनों, औजारों और वाहनों की भी पूजा करें. पूजा के अंत में भगवान विश्वकर्मा की कथा पढ़ें और आरती करें. आरती के बाद सभी लोगों को प्रसाद बांटें और इसके बाद खुद प्रसाद ग्रहण करें.

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