गणेश चतुर्थी का पर्व भगवान गणेश को समर्पित होता है. इस दिन भक्त अपने घर में गणपति बप्पा की स्थापना करते हैं और साथ ही उनकी पूजा करते हैं. धार्मिक मान्यता है कि गणपति बप्पा की पूरी श्रद्धा से पूजा करने से जीवन की परेशानियां कम होती हैं. इसके अलावा घर में सुख-शांति बनी रहती है.
गणेश चतुर्थी पर बप्पा की पूजा करते समय उन्हें उनकी प्रिय चीजें चढ़ाने का भी खास महत्व माना गया है. अक्सर लोग सोचते हैं कि उन्हें केवल मोदक पसंद हैं, लेकिन आप मोदक के अलावा भी कई चीज़ उन्हें चढ़ा सकते हैं.
भगवान गणेश को दूर्वा बहुत प्रिय मानी जाती है. पूजा के समय बप्पा को 11 या 21 दूर्वा चढ़ाना काफी शुभ माना जाता है. आप चाहें तो दूर्वा की माला भी अर्पित कर सकते हैं. धार्मिक मान्यता है कि दूर्वा चढ़ाने से गणेश जी प्रसन्न होते हैं और जीवन की रुकावटें दूर होती हैं.
गणेश जी की पूजा में लाल सिंदूर का खास महत्व है. इसे शुभ और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है. पूजा के समय बप्पा को लाल सिंदूर अर्पित करने से उनकी कृपा मिलती है.
बप्पा के साथ मोदक को हमेशा जोड़ा जाता है. मोदक बप्पा का सबसे प्रिय भोग माना जाता है. गणेश चतुर्थी पर उन्हें मोदक चढ़ाने की परंपरा रही है. मान्यता है कि मोदक का भोग लगाने से भगवान गणेश प्रसन्न होते हैं और भक्तों को बुद्धि व सफलता का आशीर्वाद देते हैं.
गणेश जी को गन्ना या गन्ने का रस भी अर्पित किया जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, गन्ना जीवन में मिठास और सुख का प्रतीक होता है. पूजा में गन्ने को छोटे टुकड़ों में काटकर आप पूजा के समय बप्पा को चढ़ा सकते हैं.
केला को आप पूजा के समय बप्पा को चढ़ा सकते हैं. केले को काफी शुभ फल माना जाता है. इसे उन्नति और वैभव से जोड़ा जाता है. गणेश चतुर्थी पर बप्पा को केला चढ़ाते समय इसे हमेशा जोड़े में चढ़ाने की परंपरा बताई गई है.
गणेश पूजा में साबुत चावल यानी अक्षत का भी खास महत्व होता है. पूजा में टूटे हुए चावल की जगह पूरे चावल चढ़ाने चाहिए. अक्षत को पूर्णता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है.
लाल गुड़हल का फूल भगवान गणेश को काफी प्रिय माना जाता है. इसका लाल रंग शक्ति और शुभता का प्रतीक माना जाता है. गणेश चतुर्थी पर ताजा लाल गुड़हल चढ़ाने से घर में सुख-समृद्धि आने और परेशानियां दूर होने की मान्यता है.