शिवलिंग को भगवान शिव का निराकार स्वरूप माना जाता है. शिव पूजा में इसका विशेष महत्व है. मान्यता है कि शिवलिंग में भगवान शिव और शक्ति दोनों का वास होता है. इसलिए शिवलिंग की पूजा करने से शिव और शक्ति, दोनों की उपासना पूरी मानी जाती है.
धार्मिक मान्यताओं में अलग-अलग प्रकार के शिवलिंगों की पूजा का उल्लेख मिलता है, जैसे स्वयंभू शिवलिंग, नर्मदेश्वर शिवलिंग, जनेऊधारी शिवलिंग, सोने-चांदी के शिवलिंग और पारद शिवलिंग. इनमें स्वयंभू शिवलिंग की पूजा को विशेष फल देने वाली माना जाता है.
शिवलिंग की स्थापना घर और मंदिर में अलग तरीके से की जाती है. मान्यता के अनुसार शिवलिंग कहीं भी स्थापित किया जाए, उसकी वेदी का मुख उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए. घर में स्थापित शिवलिंग बहुत बड़ा नहीं होना चाहिए.
धार्मिक मान्यता के अनुसार घर के लिए शिवलिंग का आकार अधिकतम 6 इंच तक रखना उचित माना जाता है. वहीं मंदिर में बड़े आकार का शिवलिंग स्थापित किया जा सकता है. विशेष मनोकामना या किसी खास उद्देश्य की पूजा के लिए पार्थिव शिवलिंग बनाकर उसकी पूजा करने की भी परंपरा है.
भगवान शिव की पूजा में जल और बेलपत्र का विशेष महत्व माना जाता है. इन दोनों से भी शिवजी की विधि से पूजा की जा सकती है. इसके अलावा कच्चे दूध, सुगंध, गन्ने के रस और चंदन से भी शिवलिंग का अभिषेक किया जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शिवलिंग पर कुछ फूल नहीं चढ़ाए जाते. इनमें सेमल, जूही, कदंब और केतकी के फूल शामिल हैं.
शिवलिंग पर जल या कोई अन्य तरल पदार्थ चढ़ाते समय उसे एक धारा के रूप में अर्पित करना चाहिए. वहीं कोई ठोस वस्तु चढ़ानी हो तो उसे दोनों हाथों से श्रद्धा के साथ शिवलिंग पर अर्पित करने की मान्यता है.
शिवलिंग पर कोई भी सामग्री अर्पित करने के बाद अंत में जल जरूर चढ़ाना चाहिए. साथ ही पूजा में तामसिक चीजों का प्रयोग नहीं करना चाहिए. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शिव पूजा में किसी भी तरह के मारण प्रयोग से भी बचना चाहिए.