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बार-बार आ रही जीवन में मुश्किलें? कहीं पितृ दोष तो नहीं इसकी वजह... जानें जीवन पर इसका प्रभाव

पितृ दोष का संबंध पितरों यानी परिवार के उन पूर्वजों से जोड़ा जाता है. पितृ दोष होने पर व्यक्ति को जीवन में कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है. कुछ लोग इसे काम में बार-बार आने वाली रुकावटों और सफलता मिलने में देरी से जोड़ते हैं.

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gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 20 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 2:51 PM IST

ज्योतिष में पितृ दोष को एक खास दोष माना जाता है. मान्यता है कि इसका संबंध पूर्वजों और पिछले जन्मों के कर्मों से हो सकता है. कई लोग जीवन में बार-बार आने वाली परेशानियों को पितृ दोष से जोड़कर देखते हैं. हालांकि, हर परेशानी का कारण पितृ दोष हो, यह जरूरी नहीं है. चलिए बताते हैं कि पितृ दोष क्या है, इसका क्या प्रभाव बताया जाता है और इससे राहत पाने के लिए कौन से उपाय किए जाते हैं.

पितृ दोष क्या होता है?

ज्योतिष के अनुसार, पितृ दोष का संबंध पितरों यानी परिवार के उन पूर्वजों से जोड़ा जाता है, जो अब इस दुनिया में नहीं हैं. कुछ ज्योतिषीय मान्यताओं में कुंडली में राहु की स्थिति को इसका कारण बताया जाता है. माना जाता है कि राहु की कुछ स्थितियां व्यक्ति के जीवन में रुकावट और परेशानी का संकेत दे सकती हैं. इन्हीं संकेतों को कई बार पितृ दोष से जोड़ दिया जाता है.

पितृ दोष का जीवन पर क्या प्रभाव बताया जाता है?

ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, पितृ दोष होने पर व्यक्ति को जीवन में कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है. कुछ लोग इसे काम में बार-बार आने वाली रुकावटों और सफलता मिलने में देरी से जोड़ते हैं.

इसके अलावा, विवाह में देरी, परिवार में तनाव, स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं और अचानक होने वाली दुर्घटनाओं को भी पितृ दोष से जोड़कर देखा जाता है. हालांकि, इन समस्याओं के पीछे कई दूसरे कारण भी हो सकते हैं. इसलिए केवल किसी परेशानी के आधार पर पितृ दोष मान लेना सही नहीं है.

पितृ दोष से राहत पाने के लिए क्या करें?

धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं में पितृ दोष से राहत पाने के लिए कुछ उपाय बताए गए हैं. इन्हें आस्था और परंपरा के रूप में अपनाया जा सकता है.

  • जरूरतमंदों को भोजन कराएं: अमावस्या के दिन गरीब और जरूरतमंद लोगों को भोजन कराना एक पारंपरिक उपाय माना जाता है.
  • पीपल का पेड़ लगाएं: पीपल का पौधा लगाकर उसकी देखभाल करना और पर्यावरण को सुरक्षित रखना अच्छा कार्य है.
  • दान करें: ग्रहण या अन्य शुभ अवसरों पर अपनी क्षमता के अनुसार जरूरतमंद लोगों को भोजन, कपड़े या दूसरी जरूरी चीजें दान कर सकते हैं.
  • भगवद्गीता का पाठ करें: मन की शांति और अच्छे विचारों के लिए रोज सुबह श्रीमद्भगवद्गीता पढ़ सकते हैं.
  • अपने कर्म अच्छे रखें: दूसरों की मदद करना, बड़ों का सम्मान करना और ईमानदारी से जीवन जीना अच्छी आदतें हैं.

 

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