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Sindoor Khela: क्या है बंगाली समुदाय की सिंदूर खेला परंपरा, कितनी है पुरानी, सबकुछ जानें

दुर्गा पूजा के आखिरी दिन मां दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाता है. बंगाली समुदाय में विसर्जन से पहले सिंदूर खेला की परंपरा निभाई जाती है. इसमें महिलाएं मां दुर्गा के चरणों मे सिंदूर और मिठाई चढ़ाती हैं. इसके बाद एक-दूसरे को सिंदूर लगातार सुख-समृद्धि की कामना करती हैं.

Sindoor Khela
शशिकांत सिंह
  • नई दिल्ली,
  • 21 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 8:44 AM IST

नवरात्रि के बाद दशमी तिथि को दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन करने की परंपरा है. देशभर में इस तिथि को प्रतिमा का विसर्जन होता है. बंगाली समुदाय में दुर्गा प्रतिमा विसर्जन की परंपरा कुछ अलग है. बंगाली समुदाय में प्रतिमा विसर्जन से पहले सिंदूर खेला का आयोजन होता है. सिंदूर खेला परंपरा उतनी ही पुरानी मानी जाती है, जितनी पुरानी दुर्गा पूजा की परंपरा है. इस परंपरा को बंगाली महिलाएं धार्मिक तौर पर मनाती हैं.

कब होता है सिंदूर खेला?
सिंदूर खेला बंगाली समुदाय का एक लोकप्रिय परंपरा है. इसे बंगाली शादीशुदा महिलाएं धार्मिक रूप से निभाती हैं. इस परंपरा को दुर्गा पूजा के आखिरी दिन मनाया जाता है. दुर्गा पूजा में की जाने वाली ये परंपरा हर बंगाली महिला के दिल में एक अहम जगह रखता है.

क्या है सिंदूर खेला परंपरा?
इस परंपरा में शादीशुदा महिलाएं सबसे पहले मां दुर्गा के चरणों में सिंदूर लगाती हैं. इसके साथ ही मां दुर्गा को मिठाई भी चढ़ाई जाती है. इसके बाद इस आनंददायक खेल में शामिल होती हैं. महिलाएं इसके बाद एक-दूसरे के चेहरे और मांग में सिंदूर लगाती हैं और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं. पहले इस परंपरा को बंगाली महिलाएं ही निभाती थी, लेकिन अब ये देश के दूसरे हिस्सों में भी पॉपुलर हो गया है.

सिंदूर खेला का खास पहनावा?
सिंदूर खेला के दौरान अलग तरह का पहनावा होता है. इस दौरान सुहागिन महिलाएं मुख्य तौर पर पारंपरिक लाल और सफेद साड़ी पहनती हैं. सिंदूर खेला में चौड़े लाल बॉर्डर वाली सफेद या क्रीम रंग की साड़ी पहनती हैं. इसके साथ ही लाल या गोल्डन ब्लाउज, पारंपरिक सोने के गहने, शंख-पोला और माथे पर बड़ी लालिमा सा सिंदूर लगाती हैं.

400 से ज्यादा पुरानी परंपरा-
सिंदूर खेला परंपरा बंगाली समुदाय की सबसे पुरानी परंपराओं में से एक है. इसे 400 से 450 साल पुराना माना जाता है. ये भी मान्यता है कि जब से दुर्गा पूजा त्योहार मनाया जाता है, तब से ये परंपरा चली आ रही है. आज के समय में ये परंपरा काफी पॉपुलर हो गई है. देश में कई जगहों पर इसे मनाया जाता है.

क्यों होता है सिंदूर खेला?
पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक मां दुर्गा को बेटी माना जाता है. मान्यता है कि दुर्गा पूजा के दौरान मां दुर्गा अपने मायके आती हैं और कुछ दिन रहने के बाद दशमी तिथि को ससुराल जाती हैं. हिंदू धर्म में जिस तरह से बेटी की विदाई के समय सिंदूर लगाया जाता है, उसी तरह से मां दुर्गा की विदाई के समय भी सिंदूर से पूजा की जाती है.

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