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घर बैठे होंगे दुर्लभ मंदिरों के दर्शन, क्या है दुर्लभ दर्शन प्लेटफॉर्म और कैसे करता है काम

देश के श्रद्धालुओं के लिए दुर्लभ दर्शन प्लेटफॉर्म लॉन्च किया गया है. इस 6डी वर्चुअल रियलिटी तकनीक से देश के प्रमुख मंदिरों की पूजा-अर्चना का वास्तविक अनुभव किया जा सकता है. इस सुविधा को अभी देश के 11 बड़े मंदिरों में शुरू किया गया है. इसके ब्रांड एंबेसडर एक्टर आशुतोष राणा को बनाया गया है.

Ashutosh Rana (Photo/PTI)
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 01 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 6:55 PM IST

अगर आप तीर्थ यात्रा करने में सक्षम नहीं हैं या फिर भीड़ में भगवान के दर्शन कर संतुष्टि नहीं मिलती तो अब आपके लिए एक खास विकल्प मौजूद है. इसका नाम 'दुर्लभ दर्शन' है. ये एक आध्यात्मिक प्लेटफॉर्म है, जिसमें '6D VR तकनीक के जरिये देश के प्रमुख मंदिरों के दर्शन का एक अनूठा अनुभव उपलब्ध कराया जाता है. अभी ये सुविधा अयोध्या, काशी समेत देश के 11 प्रसिद्ध मंदिरों में उपलब्ध है, जहां आप सुकून से बैठकर अपने आराध्य देव को करीब से महसूस कर सकेंगे. अभिनेता आशुतोष राणा को देश के इस पहले 6D मंदिर दर्शन सेवा तकनीक का ब्रांड एंबेसडर बनाया गया है. 

क्या है दुर्लभ दर्शन सुविधा?
मंदिर से दूर रहकर गर्भगृह की पूजा में शामिल हो सकेंगे. ये सब 'दुर्लभ दर्शन' से संभव है. दुर्लभ दर्शन एक ऐसा पिटारा है, जिसमें हर धाम समाया है. असल में 'दुर्लभ दर्शन' एक आध्यात्मिक प्लेटफॉर्म है. जिसमें '6D VR तकनीक के जरिये देश के प्रमुख मंदिरों के दर्शन का एक अनूठा अनुभव उपलब्ध कराया जाता है. इसमें वर्चुअल रियलिटी के साथ-साथ जल, वायु, सुगंध और पौराणिक कथाओं के मेल से साक्षात गर्भगृह में होने का अहसास कराया जाता है. यूं कहिए कि यहां आस्था और तकनीक के मेल से एक सुंदर आध्यात्मिक वातावरण का निर्माण किया जाता है. यहां एक ओर भगवान राम और उनके अयोध्या की कहानी है तो काशी विश्वनाथ का इतिहास भी है. बस इसे आंखों पर लगाइये और यात्रा पर निकल पड़िए. इसमें अभिनेता आशुतोष राणा आपको धर्मस्थलों की कहानी सुनाते भी नजर आएंगे.

11 मंदिरों में है ये सुविधा-
फिलहाल ये सुविधा अयोध्या, काशी समेत देश के 11 प्रसिद्ध मंदिरों में उपलब्ध है. जहां आप सुकून से बैठकर अपने आराध्य देव को करीब से महसूस कर सकेंगे. अभिनेता आशुतोष राणा को देश के पहले 6D मंदिर दर्शन सेवा तकनीक का ब्रांड एंबेसडर बनाया गया है. आशुतोष राणा ने कहा कि धर्म का अपना विज्ञान होता है और  विज्ञान का अपना धर्म, पर जहां धर्म और विज्ञान दोनों मिल जाते हैं, वह दुर्लभ दर्शन है.

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