चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर तरकुलहा माता मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिल रही है. मान्यता है कि मां के दरबार में जो भी सच्चे मन से मुराद मांगी जाती है, वह जरूर पूरी होती है. यही कारण है कि नवरात्रि के दौरान यहां श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ता है. हर दिन बड़ी संख्या में भक्त माता के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंच रहे हैं, जिससे पूरा मंदिर परिसर भक्ति के रंग में रंगा नजर आता है.
गोरखपुर से 20 किलोमीटर दूर स्थित है मंदिर
यह प्रसिद्ध तरकुलहा देवी मंदिर गोरखपुर से करीब 20 किलोमीटर पूरब दिशा में स्थित है. यहां दूर-दराज के इलाकों से लोग अपनी मनोकामनाएं लेकर आते हैं और मां के चरणों में माथा टेकते हैं. चैत्र नवरात्रि के पहले दिन ही मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी, जो मां के प्रति अटूट आस्था को दर्शाती है.
आजादी की लड़ाई से जुड़ा है मंदिर का इतिहास
इस मंदिर का इतिहास 1857 में हुए पहले स्वतंत्रता संग्राम से भी जुड़ा हुआ है. क्रांतिकारी शहीद बाबू बंधु सिंह अंग्रेजों से बचने के लिए जंगल में रहने लगे थे. इसी दौरान उन्होंने तरकुल के पेड़ों के बीच मां की पिंडी स्थापित की थी. अंग्रेजी हुकूमत के समय बाबू बंधु सिंह ने इसी क्षेत्र से गुरिल्ला युद्ध करते हुए कई अंग्रेज अफसरों का सामना किया.
फांसी और चमत्कार की कथा
जब अंग्रेजों ने बाबू बंधु सिंह को पकड़ लिया, तो उन्हें फांसी की सजा सुनाई गई. बताया जाता है कि सात बार फांसी का फंदा टूट गया. आठवीं बार जब फांसी दी गई, तो उन्होंने मां का आह्वान करते हुए अपने चरणों में स्थान देने की प्रार्थना की. उसी समय यहां तरकुल का पेड़ टूट गया और वहां से रक्त की धारा बहने लगी. इस घटना के बाद अंग्रेज भी हैरान रह गए. तब से लोगों की आस्था इस मंदिर से गहराई से जुड़ गई और श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ने लगी.
नवरात्रि में विशेष आस्था और भीड़
नवरात्रि के दौरान इस मंदिर में पूजा का विशेष महत्व होता है. हर साल बड़ी संख्या में लोग यहां दर्शन के लिए आते हैं. खासकर महिलाएं अपने परिवार और पति के साथ माता के दरबार में पूजा करने पहुंचती हैं. भक्तों का मानना है कि यह एक जागृत मंदिर है, जहां मां अपने भक्तों की हर मनोकामना पूरी करती हैं.
आस्था का प्रमुख केंद्र बना मंदिर
वर्तमान समय में मंदिर का जीर्णोद्धार किया जा चुका है और यह क्षेत्र अब एक प्रमुख धार्मिक स्थल बन गया है. हर साल और हर नवरात्रि में यहां श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ती जा रही है. लोगों की गहरी आस्था और विश्वास ने तरकुलहा माता मंदिर को एक विशेष पहचान दिलाई है, जहां भक्ति और विश्वास का अद्भुत संगम देखने को मिलता है.
(रिपोर्ट-गजेंद्र त्रिपाठी)
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