नटराज के पैरों तले दबा रक्षस कौन है? क्यों भगवान शिव ने अपस्मार को मारा नहीं, जान लें रहस्य

जब भी हम भगवान शिव के नटराज स्वरूप को देखते हैं, तो हमारी नजर उनके दिव्य नृत्य, चार भुजाओं और अग्नि मंडल पर जाती है. लेकिन बहुत कम लोग उस छोटे से पात्र पर ध्यान देते हैं, जिस पर भगवान शिव अपना एक पैर रखे हुए हैं. यह छोटा सा पात्र कोई साधारण आकृति नहीं, बल्कि अपस्मार नामक एक दैत्य का प्रतीक है.

नटराज
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 28 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 6:11 PM IST

जब भी हम भगवान शिव के नटराज स्वरूप को देखते हैं, तो हमारी नजर उनके दिव्य नृत्य, चार भुजाओं और अग्नि मंडल पर जाती है. लेकिन बहुत कम लोग उस छोटे से पात्र पर ध्यान देते हैं, जिस पर भगवान शिव अपना एक पैर रखे हुए हैं. यह छोटा सा पात्र कोई साधारण आकृति नहीं, बल्कि अपस्मार नामक एक दैत्य का प्रतीक है. हिंदू पौराणिक कथाओं में अपस्मार अज्ञान, अहंकार और विस्मृति (भूलने की प्रवृत्ति) का प्रतीक माना गया है. सवाल यह उठता है कि भगवान शिव उसे मारते क्यों नहीं, बल्कि केवल अपने पैर तले दबाकर रखते हैं? इसका उत्तर बेहद गहरा और आध्यात्मिक है.

कौन है अपस्मार?
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, नटराज की मूर्ति में भगवान शिव के पैरों के नीचे जो बौना सा दैत्य दिखाई देता है, वही अपस्मार है. वह केवल एक राक्षस नहीं, बल्कि इंसान के भीतर मौजूद अज्ञान, अहंकार और भ्रम का प्रतीक है. माना जाता है कि अगर अज्ञान पूरी तरह समाप्त हो जाए, तो ज्ञान का कोई महत्व ही नहीं रहेगा. इसलिए अपस्मार को खत्म नहीं किया गया, बल्कि नियंत्रित किया गया.

अपस्मार का जन्म कैसे हुआ?
एक कम जानी-पहचानी कथा के अनुसार, अपस्मार का जन्म ब्रह्मांड में फैले अहंकार और अज्ञान से हुआ था. कहा जाता है कि एक समय ऋषि-मुनि और तपस्वी अपने ज्ञान और तपस्या के कारण अत्यधिक घमंडी हो गए थे. वे खुद को ईश्वर से भी श्रेष्ठ समझने लगे और भगवान की शक्ति को चुनौती देने लगे. उसी अहंकार और नकारात्मक ऊर्जा से अपस्मार का जन्म हुआ. अपस्मार के पास ऐसी शक्ति थी कि वह लोगों की स्मृति और विवेक को नष्ट कर सकता था. उसके प्रभाव से व्यक्ति सही-गलत का भेद भूल जाता था. जब उसका आतंक बढ़ने लगा, तब भगवान शिव ने नटराज रूप धारण किया और तांडव नृत्य करते हुए अपस्मार को अपने चरणों के नीचे दबा दिया.

भगवान शिव ने अपस्मार को मारा क्यों नहीं?
यह प्रश्न सबसे अहम है. भगवान शिव ने अपस्मार को इसलिए नहीं मारा क्योंकि अज्ञान का पूरी तरह नाश संभव नहीं है. जैसे प्रकाश का अर्थ अंधकार के बिना अधूरा है, वैसे ही ज्ञान का महत्व अज्ञान के बिना नहीं समझा जा सकता. अज्ञान ही हमें सीखने, जानने और आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है. इसी कारण भगवान शिव ने अपस्मार को केवल नियंत्रित किया. उसे अपने पैर के नीचे दबाकर रखा, ताकि वह हावी न हो सके और मानवता को नुकसान न पहुंचाए.

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