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Vijyadashmi: क्यों लोग करते हैं शस्त्र पूजा? क्या है इसका पौराणिक महत्व... किस तरह से की जाती है पूजा?

विजयादशमी के दिन कई लोग शस्त्र पूजा भी करते है. इस लोग हथियारों के साथ अपने काम में इस्तेमाल होने वाले औजारों की भी पूजा करते हैं. हिंदू धर्म में शस्त्रों को शक्ति, साहस और अपनी रक्षा करने का प्रतीक माना जाता है.

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gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 20 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 11:40 AM IST

दशहरा यानी विजयादशमी का त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है. इस दिन भगवान श्रीराम की रावण पर जीत और मां दुर्गा की महिषासुर पर विजय का उत्सव मनाया जाता है. देश के कई हिस्सों में दशहरे पर शस्त्र पूजा करने की परंपरा भी है. इस दिन लोग हथियारों के साथ अपने काम में इस्तेमाल होने वाले औजारों की भी पूजा करते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि दशहरे पर शस्त्र पूजा क्यों की जाती है और इसका क्या महत्व है?

दशहरे पर शस्त्र पूजा क्यों की जाती है?

हिंदू धर्म में शस्त्रों को शक्ति, साहस और अपनी रक्षा करने का प्रतीक माना जाता है. दशहरे पर शस्त्र पूजा करने का उद्देश्य केवल हथियारों की पूजा करना नहीं है. इसके जरिए यह संदेश दिया जाता है कि शक्ति का इस्तेमाल हमेशा सही काम और दूसरों की रक्षा के लिए करना चाहिए.

मान्यता है कि विजयादशमी का दिन नई शुरुआत और जीत के लिए शुभ होता है. इसी वजह से सैनिक, पुलिसकर्मी और सुरक्षा से जुड़े लोग अपने हथियारों की पूजा करते हैं. वहीं, किसान, कारीगर और दूसरे काम करने वाले लोग अपने औजारों की पूजा करके उनके प्रति सम्मान जताते हैं.

महाभारत से जुड़ी है शस्त्र पूजा की परंपरा

दशहरे पर शस्त्र पूजा की एक मान्यता महाभारत से भी जुड़ी है. पौराणिक कथा के अनुसार, पांडवों ने अपने अज्ञातवास के दौरान अपने हथियार शमी के पेड़ में छिपाकर रखे थे. अज्ञातवास पूरा होने के बाद अर्जुन ने शमी के पेड़ से अपने हथियार वापस निकाले और राजा विराट के राज्य की रक्षा के लिए कौरवों की सेना का सामना किया.

इसी घटना को विजयादशमी से जोड़कर देखा जाता है. यही वजह है कि कई जगहों पर दशहरे के दिन शमी के पेड़ और शस्त्रों की पूजा की जाती है.

भगवान श्रीराम और मां दुर्गा से भी है संबंध

दशहरे का संबंध भगवान श्रीराम की रावण पर जीत से है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, श्रीराम ने रावण का वध करके बुराई का अंत किया था. वहीं, मां दुर्गा ने महिषासुर का वध करके बुरी शक्तियों पर जीत हासिल की थी. ये दोनों घटनाएं सिखाती हैं कि अन्याय के खिलाफ खड़े होना और धर्म की रक्षा करना जरूरी है.

कैसे की जाती है शस्त्र पूजा?

दशहरे के दिन सबसे पहले हथियारों और औजारों की सफाई की जाती है. इसके बाद उन्हें साफ जगह पर रखकर पूजा की जाती है. पूजा में रोली, अक्षत, फूल और दीपक का इस्तेमाल किया जाता है. कई लोग इस दिन अपने वाहनों, मशीनों और काम में आने वाले दूसरे उपकरणों की भी पूजा करते हैं.

 

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