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सहारनपुर में महाभारतकालीन अनोखा शिव मंदिर, संतान की मन्नत लेकर पहुंचते हैं दंपति...कद्दू-गुड़ चढ़ाकर मांगते हैं संतान सुख, दूर-दूर से आते हैं श्रद्धालु

मंदिर के पुजारी राकेश गिरी के मुताबिक, दुर्योधन ने मंदिर का मुख्य द्वार पूर्व दिशा में बनवाया था, लेकिन जब पांडव यहां पहुंचे तो भीम ने अपनी शक्ति से मंदिर को घुमा दिया. इसी मान्यता के चलते मंदिर का प्रवेश द्वार पश्चिम दिशा की ओर हो गया.

Shiva Temple
राहुल कुमार
  • सहारनपुर ,
  • 11 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 5:16 PM IST

सहारनपुर जनपद में भगवान शिव का एक ऐसा अनोखा मंदिर मौजूद है, जिसे लेकर महाभारत काल से जुड़ी कई मान्यताएं प्रचलित हैं. नौनाता क्षेत्र के बरसी गांव में स्थित यह प्राचीन शिव मंदिर अपने पश्चिममुखी शिवलिंग और अनोखी वास्तुकला के लिए श्रद्धालुओं के बीच खास आस्था का केंद्र है. मान्यता है कि करीब पांच हजार साल पुराने इस मंदिर का निर्माण महाभारत काल में दुर्योधन ने कराया था. कहा जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण भी इस क्षेत्र में कुछ समय के लिए रुके थे और उन्होंने इस भूमि को ब्रज जैसा बताया था. मंदिर परिसर से समय-समय पर मिले प्राचीन अवशेष भी इसकी ऐतिहासिक प्राचीनता की ओर इशारा करते हैं.

दुर्योधन ने मंदिर का मुख्य द्वार पूर्व दिशा में बनवाया
मंदिर के पुजारी राकेश गिरी के मुताबिक, दुर्योधन ने मंदिर का मुख्य द्वार पूर्व दिशा में बनवाया था, लेकिन जब पांडव यहां पहुंचे तो भीम ने अपनी शक्ति से मंदिर को घुमा दिया. इसी मान्यता के चलते मंदिर का प्रवेश द्वार पश्चिम दिशा की ओर हो गया. मंदिर के गर्भगृह में स्थापित विशाल और गहरी शिवलिंग पर हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु जलाभिषेक करते हैं. पुजारी का कहना है कि आमतौर पर शिव मंदिरों का मुख पश्चिम दिशा की ओर नहीं होता, यही वजह है कि बरसी महादेव मंदिर को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष आकर्षण है. सावन और महाशिवरात्रि के दौरान यहां भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है.

बरसी महादेव मंदिर में तीन दिवसीय मेले का आयोजन
महाशिवरात्रि के अवसर पर बरसी महादेव मंदिर में तीन दिवसीय मेले का आयोजन भी होता है, जिसमें दूर-दराज से लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं. यहां जलाभिषेक के साथ दूध, जल और बेलपत्र चढ़ाने की परंपरा है. मंदिर में प्रसाद के रूप में बेर, कद्दू और गुड़ की भेली चढ़ाई जाती है. खास तौर पर नवविवाहित जोड़े यहां पहुंचकर भगवान शिव का आशीर्वाद लेते हैं. मान्यता है कि शादी के बाद यहां पूजा करने और मन्नत मांगने से दांपत्य जीवन सुखमय रहता है. कुछ श्रद्धालु संतान प्राप्ति की मनोकामना लेकर भी यहां पहुंचते हैं और कद्दू व गुड़ चढ़ाते हैं.

मन्नत होती है पूरी
श्रद्धालु मोनू गोस्वामी बताते हैं कि उनकी वर्ष 2014 में बरसी गांव में शादी हुई थी और उन्होंने भगवान शिव से नौकरी लगने की मन्नत मांगी थी. उनके मुताबिक वर्ष 2015 में उनका यूपी पुलिस में चयन हुआ और 2016 में उन्होंने नौकरी ज्वाइन की. इसके बाद वर्ष 2022 में उनका चयन दरोगा पद के लिए भी हुआ और अब वह दिल्ली में एसआई के पद पर कार्यरत हैं. वहीं अन्य श्रद्धालु भी बरसी महादेव मंदिर को आस्था और मनोकामना पूर्ति का केंद्र बताते हैं. मंदिर के पुजारी के अनुसार महाशिवरात्रि पर करीब 20 हजार तक श्रद्धालु जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं और पुलिस-प्रशासन की ओर से भी व्यवस्थाओं में सहयोग किया जाता है.

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