World’s Tallest Lord Ram Statue in Goa: भगवान श्रीराम की सबसे ऊंची प्रतिमा कहां लगी है? किसने बनाई है प्रभु की ये मूर्ति

पीएम मोदी ने गोवा में श्री संस्थान गोकर्ण पर्तगाली जीवोत्तम मठ में भगवान श्रीराम की कास्य की प्रतिमा का अनावरण किया. इसे भगवान राम की सबसे ऊंची प्रतिमा कहा जा रहा है. दक्षिण गोवा में राम की ये प्रतिमा 77 फीट ऊंची है. इस प्रतिमा को स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के मशहूर मूर्तिकार राम सुतार ने बनाई है.

World’s Tallest Lord Ram Statue in Goa
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 28 नवंबर 2025,
  • अपडेटेड 7:04 PM IST

गोवापुरी प्रभु आवत जानी… भई सकल सोभा कै खानी. कभी संत तुलसीदास ने अयोध्या में श्रीराम के आगमन का दृश्य बताते हुए मानस में ये चौपाई लिखी थी. कभी अवध के लिए लिखी गई ये चौपाई आज गोवा में चरितार्थ हो गई. आज यानी 28 नवंबर को देश के प्रधानमंत्री ने गोवा के तट पर श्रीराम की विशाल प्रतिमा का अनावरण किया. 55 फ़ीट की ये कांस्य प्रतिमा दुनिया में श्रीराम की सबसे ऊंची प्रतिमा है. गोवा में मौजूद गोकर्ण जीवोत्तम मठ के 550 साल पूरे होने के अवसर पर ये प्रतिमा वहां स्थापित की गई है. 

राजा रामचंद्र की 77 फीट ऊंची प्रतिमा का अनावरण-
भारत के पश्चिमी छोर पर बसा गोवा वो राज्य है, जो खूबसूरत बीच, पुराने चर्चेज और अपने बेफिक्र माहौल के चलते दुनिया भर के सैलानियों की पसंद है. लेकिन इस राज्य की पहचान बस इतनी भर नहीं है. दुनिया की विविध संस्कृतियों, परंपराओं और संस्कारों के मेल से उभरे गोवा के वर्तमान स्वरूप की जड़ें वास्तव में सनातन परंपरा के इतिहास से जुड़ी हैं. सनातन इतिहास की उसी डोर को थाम कर आज गोवा में चक्रवर्ती राजा रामचंद्र के महारूप की स्थापना की गई. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गोवा में धनुर्धारी राजा रामचंद्र की 77 फ़ीट ऊंची प्रतिमा का अनावरण किया. बताया जा रहा है कि यह दुनिया में प्रभु श्रीराम की अब तक निर्मित सबसे ऊंची प्रतिमा है. 

राम सुतार ने बनाई प्रभु श्रीराम की प्रतिमा-
इस प्रतिमा को गुजरात में 'स्टेच्यू ऑफ यूनिटी' का निर्माण करने वाले शिल्पकार राम सुतार ने बनाया है. इसका निर्माण कांसे से किया गया है. इसमें भगवान राम एक हाथ में धनुष लिए दिखाई दे रहे हैं. उनके चेहरे पर सौम्यता, दृढ़ता और दिव्य आभा दिख रही है. यह प्रतिमा आधुनिक भारतीय शिल्प कौशल का बेमिसाल उदाहरण है. जानकारी के अनुसार प्रतिमा के दो मॉडल बनाए गए. जिनमें से एक चुना गया और फिर उसके आधार पर इस विशाल प्रतिमा का निर्माण किया गया. श्रीराम की जैसी छवि का निर्माण करने का अनुरोध किया गया था. मूर्तिकारों ने उसी के अनुरूप इसे तैयार करने का प्रयास किया. 

प्रतिमा पर राम के अलग-अलग नाम-
भगवान श्रीराम की इस प्रतिमा की खास बात यह भी है कि इसके आधार स्तंभ पर श्रीराम के अलग-अलग नाम भी उकेरे गए हैं. इसका निर्माण नोएडा की वर्कशॉप में किया गया और फिर स्थापित करने के लिए इसे गोवा ले जाया गया. श्रीराम की यह प्रतिमा दक्षिणी गोवा के श्री संस्थान गोकर्ण पार्तगली जीवोत्तम मठ में स्थापित की गई है.

आपको बता दें, श्री संस्थान गोकर्ण पर्तगाली जीवोत्तम मठ, प्रथम गौड़ सारस्वत ब्राह्मण वैष्णव मठ है. यह द्वैत संप्रदाय का मठ है. जिसकी स्थापना जगदगुरु माधवाचार्य ने 13वीं शताब्दी में की थी. यहां पर मठ की 550 वर्ष पुरानी परंपरा के उपलक्ष्य में दिव्य उत्सव हो रहा है. इसी सिलसिले में यहां श्रीराम की शानदार प्रतिमा लगाई गई है. गोकर्ण पर्तगाली जीवोत्तम मठ में लगी श्रीराम की यह प्रतिमा भविष्य में इस राज्य के पौराणिक इतिहास और उस पहचान का हस्ताक्षर बनेगी. जिसे बरसों पहले भुला दिया गया था. बरसों से गोवा के वर्तमान स्वरूप पर पुर्तगाली और इसाई सभ्यता की गहरी छाप नजर आती है. लेकिन बीचों से परे जब आप गोवा के अंदरूनी भागों में बसे गांवों, कस्बों और मोहल्लों को टटोलेंगे. तो आपको गोवा के उस इतिहास की झलक नजर आएगी. जिसका उल्लेख सनातन धर्म के कई पुराणों में मिलता है. 

पौराणिक इतिहास में गोवा का उल्लेख-
पौराणिक इतिहास में गोवा का उल्लेख गोमंतक के नाम से मिलता है. गोमांतक यानि गायों का प्रदेश. इसी के चलते पुर्तगालियों की औपनिवेशिक गुलामी के खिलाफ हुए आंदोलन का नाम भी गोमंतक संग्राम रखा गया. महाभारत में गोवा का उल्लेख गोपराष्ट्र यानि गोप या अहीरों के देश के रूप में मिलता है. तो दक्षिण कोंकण क्षेत्र का उल्लेख गोवाराष्ट्र के रूप में पाया जाता है. वहीं संस्कृत के कुछ पुराने स्त्रोतों में गोवा को गोपकपुरी और गोपकपट्टन कहा गया है. जिनका उल्लेख कई ग्रंथों के साथ हरिवंशम और स्कंद पुराण में भी मिलता है. 

परशुराम से गोवा का कनेक्शन-
गोवा की उत्पत्ति की एक कहानी विष्णु भगवान के अवतार परशुराम से जुड़ती है. इस कहानी के मुताबिक परशुराम जी ने सह्याद्रि पर्वत से पश्चिमी समुद्र में एक बाण मारा, जिससे समुद्र पीछे की ओर चला गया और गोवा का निर्माण हुआ. यही वजह है कि गोवा को परशुराम भूमि के नाम से भी जाना जाता है. गोवा की राजधानी पणजी में परशुराम जी की भव्य प्रतिमा स्थापित है. उत्तरी गोवा में हरमल के पास एक पर्वत को परशुराम के यज्ञ करने का स्थान माना जाता है. इसी कहानी के आधार पर आज गोवा के एक क्षेत्र का नाम बाणवली या बाणस्थली रखा गया है. 

वक्त से साथ बदलती रही सत्ता- 
वक्त के पहिए के साथ गोवा में सत्ता और शासन की धुरी भी बदलती रही. कालांतर में ये तटीय राज्य आदिलशाह सुल्तानों की रियासत का हिस्सा रहा. तो वहीं साढ़े चार सौ सालों के पुर्तगाली शासन की छाप आज तक गोवा में कदम-कदम पर नजर आती है. लेकिन इसी छाप के बीच गोवा में रहने वाले सारस्वत ब्राह्मण आज भी यहां हिंदुओं और सनातन धर्म से जुड़ी पौराणिक पहचान को जिंदा रखे हैं. गोकर्ण पार्तगली जीवोत्तम मठ भी उसी परंपरा का हिस्सा है. गोवा के अलग-अलग भागों में बने भव्य मंदिर और मठ बरसों से इसके पौराणिक इतिहास की कहानी सुनाते आ रहे हैं. अब इसी कहानी को दोहराएगी, गोवा के केनकोना बीच पर स्थापित राजाराम चंद्र की ये विशाल प्रतिमा. गोवा के उसी स्वर्णिम इतिहास की याद दिलाएगी.

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