पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने प्रवचन के दौरान छत्तीसगढ़ को भगवान राम का ननिहाल बताया गया और इस पवित्र भूमि की महिमा का वर्णन किया. कटघोरा स्थित चकचकवा हनुमान मंदिर के दर्शन का जिक्र करते हुए पर्वत पर जल होने को ईश्वर की अद्भुत माया बताया गया. इसके साथ ही एक पुरानी ट्रेन यात्रा का रोचक किस्सा साझा किया गया, जिसमें एक सहयात्री ने सीट देने से मना कर दिया था, लेकिन बाद में वही व्यक्ति मोबाइल पर उन्हीं की कथा सुनता हुआ पाया गया. स्टेशन पर स्वागत के लिए आई भीड़ को देखकर उस सहयात्री को अपनी गलती का अहसास हुआ. इस प्रसंग के माध्यम से ईश्वर को केवल 'मानने' और 'जानने' के बीच का अंतर स्पष्ट किया गया. यह समझाया गया कि बिना जाने सच्चा प्रेम और विश्वास उत्पन्न नहीं हो सकता. बाहरी सुंदरता के बजाय चरित्र की शुद्धता को अधिक महत्व दिया गया और हनुमान जी को इसका सबसे बड़ा उदाहरण बताया गया. देखें अच्छी बात.