जीवन में भौतिक सुख-सुविधाएं और धन-संपत्ति होने के बावजूद कई बार इंसान को सच्ची खुशी नहीं मिलती है. शाश्वत आनंद और सुख की प्राप्ति के लिए ईश्वर की सच्ची भक्ति आवश्यक है, जब भी कोई व्यक्ति अच्छे काम या सत्य के मार्ग पर चलता है, तो उसके जीवन में बाधाएं और विपत्तियां जरूर आती हैं. जिस तरह नदी के रास्ते में पहाड़ आते हैं, वैसे ही सत्कर्म के रास्ते में विरोधी आते हैं. ऐसे में विरोधियों से बदला लेने के बजाय उनकी सोच बदलने की प्रार्थना करनी चाहिए. सच्ची भक्ति केवल दिखावे या वेशभूषा से नहीं होती, बल्कि यह आचरण के शुद्धिकरण से जुड़ी है. जब इंसान का आचरण बदलता है, तो उसका हर कर्म पूजा बन जाता है. जो व्यक्ति जिस देवता की सच्चे मन से आराधना करता है, उसके भीतर उसी देवता के गुण झलकने लगते हैं. इसलिए जीवन में क्षमा, निर्मलता और अच्छे आचरण को अपनाना चाहिए, ताकि ईश्वर की कृपा प्राप्त हो सके और जीवन सार्थक बन सके. देखिए अच्छी बात.