बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने मेरठ में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान गुरु-शिष्य परंपरा और दीक्षा के महत्व पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा, 'हमसे कोई पूछे कि बागेश्वर महाराज जी आपके पास ऐसी कौन सी शक्ति है जो हजारों किलोमीटर दूर बैठे-बैठे आप मन की बात जान लेते हो? भैया, हमारे पास केवल हमारे गुरुदेव के चरणों के ध्यान की शक्ति है.' शास्त्री ने स्वामी विवेकानंद और रामकृष्ण परमहंस का उदाहरण देते हुए समझाया कि एक सच्चा शिष्य वही है जो अपने गुरु और माता-पिता का नाम रोशन करे. उन्होंने गुरु की डांट की तुलना कुम्हार की चोट से की, जो घड़े को मजबूत बनाने के लिए आवश्यक होती है. प्रवचन के अंत में उन्होंने 'ओ पापी मन कर ले भजन' गीत के माध्यम से जीवन की नश्वरता का संदेश दिया.