एक धार्मिक प्रवचन में नारद मुनि और चार कुमारों की कथा सुनाई गई। कथा के अनुसार, नारद मुनि ने बद्रीनाथ में चार ऋषियों—सनत, सनन्दन, सनातन और सनतकुमार—से मुलाकात की। नारद जी ने बताया कि उन्हें पृथ्वी पर सत्संग नहीं मिला। वे संतों और गृहस्थों के पास गए लेकिन कलयुग के प्रभाव से सब जगह धर्म का पतन देखा। वृंदावन में उन्होंने भक्ति देवी को देखा जो युवा थीं लेकिन उनके दो पुत्र—ज्ञान और वैराग्य—वृद्ध और मूर्च्छित अवस्था में थे। आकाशवाणी ने बताया कि सत्संग से ही उन्हें जगाया जा सकता है। चारों कुमारों ने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा ही परम सत्संग है। हरिद्वार में गंगा किनारे भागवत कथा सुनाई गई जिसमें भक्ति देवी अपने पुत्रों के साथ प्रकट हुईं। कथा में कहा गया कि भागवत सुनने से अज्ञान दूर होता है और कृष्ण भक्ति का ज्ञान प्रकट होता है।