Acchi Baat Dhirendra Shastri Ke Saath | धार्मिक प्रसंग के दौरान वक्ता ने भगवान श्रीराम, माता सीता और भक्त केवट के पावन संवाद का वर्णन किया. कथा के अनुसार गंगा पार कराने के बाद जब श्रीराम के पास उतराई देने के लिए कुछ नहीं था, तब माता जानकी ने संकोच भांपते हुए अपनी मुद्रिका श्रीराम को सौंप दी. केवट ने प्रभु से किसी भी प्रकार की मजदूरी या आभूषण लेने से साफ मना कर दिया. केवट ने श्रीराम से कहा कि जैसे वह गंगा पार कराते हैं, वैसे ही प्रभु उसे भवसागर से पार करा दें. केवट ने सांसारिक माया के स्थान पर केवल श्रीराम की अनन्य भक्ति की याचना की. वक्ता ने यह भी बताया कि प्रभु के दर्शन के बाद केवट का मन संसार की ओर नहीं गया और उसने संपूर्ण जीवन श्रीराम के ध्यान में समर्पित कर दिया. अंत में वक्ता ने उपस्थित श्रद्धालुओं को सांसारिक अर्जियों के बजाय प्रभु की सच्ची भक्ति और समर्पण का मार्ग अपनाने की प्रेरणा दी.