प्रसिद्ध कथावाचक धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने राजा दक्ष, माता सती और भगवान शिव के प्रसंग की व्याख्या की है. उन्होंने बताया कि कैसे राजा दक्ष के अहंकार के कारण भगवान शिव का अपमान हुआ और अंततः नंदी के श्राप से दक्ष का मुख बकरे का हो गया. शास्त्री जी ने मजाकिया लहजे में कहा, 'ससुराल की गालियां हैं, किसी को शादी के टाइम पर मिलती हैं, हमें तो बाद में भी मिल रही हैं', जो शिव जी ने नंदी से कहा था. कथा के दौरान उन्होंने वैवाहिक जीवन और पति-पत्नी के धर्म पर भी चर्चा की. उन्होंने सर्जरी के प्रथम जनक के रूप में भगवान शिव का उल्लेख करते हुए बताया कि कैसे उन्होंने दक्ष के शरीर पर बकरे का सिर फिट किया था.