जबलपुर में एक कथा के दौरान, बागेश्वर धाम के प्रमुख धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने अपने संघर्ष और गरीबी के दिनों को याद करते हुए भावुक हो गए. उन्होंने बताया कि कैसे उनका परिवार अत्यंत गरीबी में रहता था, उनकी मां एक ही साड़ी में साल गुजार देती थीं और वह खुद एक ही पजामा सवा-सवा महीने तक पहनते थे. उन्होंने कहा, 'जब हमने अपनी बहन की शादी में धक्के खाए, उसी दिन हमने प्रण लिया था कि अगर बालाजी की कृपा हुई तो भारत में किसी गरीब भाई को बहन के विवाह के लिए भटकना नहीं पड़ेगा' शास्त्री ने बताया कि जो लोग पहले उनका मजाक उड़ाते थे, आज वही 'बागेश्वर धाम' के नाम से अपनी दुकानें चलाते हैं. उन्होंने श्रोताओं को दुनिया से अपेक्षा न रखने और केवल बालाजी पर विश्वास करने की सलाह दी. इसके बाद उन्होंने कृष्ण और सुदामा की मित्रता की मार्मिक कथा भी सुनाई.