बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने अपने संबोधन में कहा कि ढोंग की जिंदगी जीने से बेहतर ढंग की जिंदगी जीना है. उन्होंने खड़ाऊ को लेकर चल रहे विवाद पर स्पष्ट किया कि उनकी लकड़ी की खड़ाऊ को सोने की खड़ाऊ बता दिया गया. उन्होंने कहा कि वे किसी के हिसाब से नहीं बल्कि सिर्फ अपने आराध्य बालाजी सरकार की मर्यादा के अनुसार जीवन जीते हैं. धीरेंद्र शास्त्री ने श्रद्धालुओं से कहा कि किसी चमत्कार या परचे के फेर में पड़ने के बजाय अपने भीतर परमात्मा और आनंद की खोज करनी चाहिए. उन्होंने जीवन को वर्तमान में जीने और व्यर्थ की चिंताओं से दूर रहने की सीख दी. इसके साथ ही उन्होंने अस्पतालों और जनकल्याणकारी कार्यों के महत्व पर बल देते हुए कहा कि मंदिरों में अस्पताल होने चाहिए जहां दवा और प्रार्थना दोनों मिल सकें.