धार्मिक प्रसंग में श्री राधा रानी और गोपियों के श्रीकृष्ण के प्रति अगाध प्रेम का वर्णन किया गया है। श्रीकृष्ण के मथुरा जाने के बाद गोपियों और राधा जी की विरह वेदना तथा यमुना जी में बहाए गए दोने से जुड़ी कथा का उल्लेख हुआ। भगवान श्रीकृष्ण ने उद्धव के ज्ञानाभिमान को दूर करने के लिए उन्हें ब्रज मंडल भेजा, ताकि वे गोपियों के निष्काम प्रेम और भक्ति का मर्म समझ सकें। कथा में विद्वान और विद्यावान के अंतर को स्पष्ट करते हुए रावण और हनुमान जी का उदाहरण दिया गया। इसके साथ ही मीराबाई के वृंदावन आगमन और वल्लभाचार्य परंपरा के आचार्यों के साथ हुए संवाद के माध्यम से ब्रज में केवल श्रीकृष्ण को ही एकमात्र पुरुष मानने के भाव को रेखांकित किया गया है। भक्त और भगवान के बीच अभेद संबंध तथा अनन्य भक्ति के महत्व पर प्रकाश डाला गया।