धार्मिक प्रवचन में हनुमान जी के अवतार के सात कारणों का वर्णन किया गया। पहला कारण बताया गया कि इंद्र के दरबार में अप्सरा पुंजिकस्थला को महात्मा के श्राप से बानरी बनना पड़ा और वही अंजनी माता बनीं। दूसरा कारण केसरी नाम के बानर की तपस्या से जुड़ा है जिससे शंकर जी ने उन्हें वरदान दिया। तीसरा कारण दशरथ के यज्ञ की खीर से संबंधित है जो चील द्वारा अंजना के पास पहुंची, जिससे हनुमान जी और राम जी भाई बने। चौथा कारण नंदी जी को रावण द्वारा बंदर कहने पर मिले श्राप से जुड़ा है। पांचवां कारण रावण द्वारा ग्यारह रुद्रों में से दसवें को प्रसन्न करने लेकिन ग्यारहवें को छोड़ने से संबंधित है। छठा कारण बताया गया कि रावण ने गृह प्रवेश के बाद लंका मांग ली जिससे पार्वती जी ने श्राप दिया कि वे रावण का घर उजाड़ेंगी।