आत्मशुद्धि शिविर के दौरान मानसिक शांति, आत्मसुधार और वर्तमान में जीने के नियमों पर चर्चा की गई. शिविर में कहा गया कि दुनिया को बदलने या दूसरों की बातों से विचलित होने के बजाय व्यक्ति को स्वयं में सुधार करना चाहिए. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधुनिक तकनीक के बढ़ते प्रभाव पर बात करते हुए स्पष्ट किया गया कि मशीनों और तकनीक से इंसानी दिमाग को अतिरिक्त समय मिलेगा, जिसका उपयोग मोक्ष, आत्मचिंतन और नए आविष्कारों के लिए किया जा सकता है. तीन दिवसीय शिविर के नियमों के तहत साधकों को अतीत और भविष्य की चिंता छोड़ केवल वर्तमान में जीने, 24 घंटे में अधिकतम एक घंटा मोबाइल इस्तेमाल करने, मौन रहने और प्रकृति के करीब समय बिताने का परामर्श दिया गया. इसके अलावा, जीवन में शिकायत करने के स्थान पर भगवान कृष्ण के जीवन से सीख लेकर हर विपरीत परिस्थिति का डटकर सामना करने और बाहरी प्रेरणा के बजाय आत्मबोध यानी रियलाइजेशन के मार्ग पर चलने की आवश्यकता बताई गई.