धार्मिक व्याख्यान में प्रभु भक्ति के महत्व और सांसारिक माया से दूरी बनाए रखने पर बल दिया गया। कथा में बताया गया कि हनुमान जी भक्त और भगवान श्री राम के बीच सेतु का कार्य करते हैं और भक्तों की प्रार्थना प्रभु तक पहुंचाते हैं। प्रसंग के माध्यम से समझाया गया कि सुग्रीव, विभीषण और माता जानकी को भगवान श्री राम से मिलाने में हनुमान जी की मुख्य भूमिका रही। इसके साथ ही रामसेतु निर्माण के समय गोवर्धन पर्वत से जुड़े प्रसंग का उल्लेख किया गया, जिसमें प्रभु श्री राम ने द्वापर युग में श्री कृष्ण अवतार के दौरान गोवर्धन पर्वत को धारण करने का वचन दिया था। व्याख्यान में यह भी स्पष्ट किया गया कि सच्ची साधना और प्रभु के चरणों का आश्रय लेने से व्यक्ति का कल्याण होता है तथा हनुमान जी के चरित्र को जीवन में उतारने से समाज और राष्ट्र का उत्थान संभव है।