नींद सिर्फ शरीर को आराम देने के लिए जरूरी नहीं है, बल्कि यह दिल की सेहत से जुड़े संकेत भी दे सकती है. एक नई स्टडी में वैज्ञानिकों ने पाया है कि सोते समय दिल की बिजली जैसी हलचल यानी उसकी इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी को देखकर आने वाले 10 साल में दिल की बीमारियों का खतरा पहचाना जा सकता है. इसके लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद ली गई. यह तकनीक हार्ट फेलियर, दिल की धड़कन अनियमित होने और स्ट्रोक जैसी समस्याओं के खतरे का अनुमान लगाने में मदद कर सकती है.
छाती पर लगे ECG से मिल सकते हैं संकेत
इस रिसर्च में वैज्ञानिकों ने ECG की मदद ली. ECG एक जांच है, जिससे दिल की धड़कन और उसकी इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी को रिकॉर्ड किया जाता है. शोधकर्ताओं के मुताबिक, सोते समय छाती पर लगाए गए ECG के सिर्फ एक लीड से मिलने वाले आंकड़ों का भी इस्तेमाल किया जा सकता है.
AI इन आंकड़ों का विश्लेषण करके यह अनुमान लगा सकता है कि किसी व्यक्ति को भविष्य में दिल से जुड़ी बीमारी होने का कितना खतरा है. हालांकि, यह तकनीक बीमारी होने की पक्की पुष्टि नहीं करती, बल्कि जोखिम का अनुमान देती है.
करीब 39 हजार लोगों के आंकड़ों पर हुई रिसर्च
यह रिसर्च अमेरिका की एमोरी यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों के नेतृत्व में की गई. सबसे पहले करीब 16 हजार लोगों के स्वास्थ्य और नींद से जुड़े आंकड़ों की मदद से AI सिस्टम को प्रशिक्षित किया गया. इसके बाद लगभग 10 हजार और 13 हजार लोगों के आंकड़ों पर इसकी जांच की गई. रिसर्च के नतीजे मेडिकल जर्नल SLEEP में प्रकाशित हुए हैं. इस अध्ययन को अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (NIH) का भी समर्थन मिला.
किन बीमारियों का खतरा पहचान सकता है AI?
दिल की धड़कन अनियमित होना: इसे एट्रियल फिब्रिलेशन कहते हैं. इससे दिल की धड़कन सामान्य से तेज या अनियमित हो सकती है.
स्ट्रोक: इसमें दिमाग तक खून पहुंचने में रुकावट आती है या दिमाग की रक्त वाहिका फट जाती है.
हार्ट फेलियर: इसमें दिल शरीर की जरूरत के मुताबिक खून पंप नहीं कर पाता.
मौत का खतरा: अध्ययन में किसी भी कारण से होने वाली मौत के जोखिम से भी AI स्कोर का संबंध पाया गया.
शोधकर्ताओं ने उम्र, लिंग, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और धूम्रपान जैसे दूसरे जोखिमों को ध्यान में रखने के बाद भी इन संबंधों को देखा.
हल्की नींद में दिल के संकेत ज्यादा अहम
रिसर्च के मुताबिक, नींद की शुरुआती और हल्की अवस्था में दिल की धड़कन और उसकी इलेक्ट्रिकल गतिविधि में तेजी से बदलाव होते हैं. इन बदलावों से दिल की सेहत से जुड़े ऐसे संकेत मिल सकते हैं, जिन्हें सामान्य जांच में पहचानना मुश्किल हो सकता है. आमतौर पर दिल की बीमारी का खतरा जानने के लिए उम्र, ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज और जीवनशैली जैसी बातों को देखा जाता है. इस स्टडी से पता चलता है कि नींद के दौरान ECG से मिलने वाली जानकारी इन तरीकों को और बेहतर बनाने में मदद कर सकती है.
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