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क्लॉड ने वैज्ञानिकों के दवा बनाने का 25 घंटे का काम 3 घंटे में किया, इंसानी नजरों से छूटीं 7 गलतियां भी पकड़ीं

क्लॉड ने सिर्फ गलतियां पकड़ने में ही मदद नहीं की, बल्कि दवा से जुड़े नियामकीय दस्तावेजों का शुरुआती ड्राफ्ट तैयार करने में भी समय बचाया. एन्वेडा के एक दस्तावेज को तैयार करने में AI को करीब चार घंटे लगे, जबकि यही काम हाथ से करने में लगभग तीन महीने लग सकते हैं.

AI Drug Discovery
gnttv.com
  • नई दिल्ली ,
  • 28 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 2:32 PM IST
  • इंसानों से छूटी गलतियां भी पकड़ीं
  • क्लॉड ने रिसर्च का काम आसान किया

नई दवा तैयार करने में सालों की रिसर्च, कई चरणों की जांच और ढेर सारे दस्तावेजों की जरूरत होती है. इस प्रक्रिया में छोटी-सी गलती भी आगे चलकर बड़ी परेशानी पैदा कर सकती है. अब AI कंपनी एंथ्रोपिक इसी काम को आसान बनाने में जुटी है. कंपनी ने 27 अक्टूबर को बताया कि उसका AI चैटबॉट क्लॉड दवा बनाने की रिसर्च, डॉक्यूमेंट्स की जांच और इलाज के नए विकल्प तलाशने में वैज्ञानिकों की मदद कर रहा है.

25 घंटे का काम 3 घंटे से भी कम में किया
इस पहल का एक अहम उदाहरण बायोटेक कंपनी एन्वेडा का है. कंपनी ने दवा बनाने से जुड़े 1061 पन्नों के डॉक्यूमेंट की जांच के लिए क्लॉड की मदद ली. AI ने जांच में वे सभी 11 गलतियां पकड़ लीं, जो इंसानों ने पहचानी थीं. इसके अलावा उसने सात ऐसी गलतियां भी बताईं, जिन पर इंसानों की नजर नहीं गई थी. इससे दस्तावेजों की जांच में लगने वाला समय 25 घंटे से ज्यादा से घटकर तीन घंटे से कम रह गया. कंपनी के मुताबिक, इससे जांच के समय में 89% की कमी आई.

तीन महीने का काम चार घंटे में तैयार किया
क्लॉड ने सिर्फ गलतियां पकड़ने में ही मदद नहीं की, बल्कि दवा से जुड़े नियामकीय दस्तावेजों का शुरुआती ड्राफ्ट तैयार करने में भी समय बचाया. एन्वेडा के एक दस्तावेज को तैयार करने में AI को करीब चार घंटे लगे, जबकि यही काम हाथ से करने में लगभग तीन महीने लग सकते हैं. दवा बनाने वाली कंपनियों को ऐसे दस्तावेज नियामक संस्थाओं के सामने पेश करने होते हैं. इनमें दवा के निर्माण, गुणवत्ता और सुरक्षा से जुड़ी जानकारियां शामिल होती हैं. AI की मदद से इनका शुरुआती मसौदा जल्दी तैयार हो सकता है, लेकिन अंतिम समीक्षा जरूरी रहती है. 

मांसपेशियों की दुर्लभ बीमारी के इलाज पर भी काम
एंथ्रोपिक ने मिथ्रिल मेडिसिन नाम की एक छोटी बायोटेक कंपनी का अधिग्रहण भी किया है. इस कंपनी को कोडी ट्रानबर्गर अकेले चलाते थे. वे क्लॉड की मदद से 11 बाहरी लैब के साथ प्रयोग, अनुबंध और दूसरी व्यवस्थाएं संभालते थे. कंपनी दो दुर्लभ तरह की मस्कुलर डिस्ट्रॉफी यानी मांसपेशियों को कमजोर करने वाली बीमारियों के इलाज पर काम कर रही है. क्लॉड की मदद से एक संभावित दवा का विचार 18 महीने से भी कम समय में चूहों पर शुरुआती परीक्षण तक पहुंचा. अगर आगे के नतीजे उम्मीद के मुताबिक रहे, तो इंसानों पर इसका क्लिनिकल ट्रायल 2028 के आखिर तक शुरू हो सकता है. 

एलर्जी और कैंसर के इलाज की रिसर्च में भी मदद
क्लॉड का इस्तेमाल दूसरी रिसर्च में भी किया जा रहा है. बिगहैट बायोसाइंसेज ने AI की मदद से एंटीबॉडी के डिजाइन बेहतर किए. कंपनी के शुरुआती नतीजों में कुछ डिजाइन अपने लक्ष्य से पहले के मुकाबले 10 गुना से ज्यादा मजबूती से जुड़ते पाए गए. वहीं, डाइवर्जेंस लैब्स ने खाने से होने वाली एलर्जी के इलाज से जुड़ी रिसर्च में करीब एक महीने में लगभग 35 हजार एंटीबॉडी डिजाइन तैयार करने के लिए AI का इस्तेमाल किया.


 

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